राजस्थान की प्रसिद्ध हवेलियों के लिए आने वाले सैलानियों का आवागमन हुआ और सुविधाजनक
जयपुर, 31 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान की पारंपरिक हवेलियों को देखने चुरु आने वाले सैलानियों की सुविधा के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 19.68 करोड़ की लागत चूरू रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया गया है। चूरू स्टेशन के प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज, स्टेशन, टिकट खिड़की प्रतीक्षालय, सर्कुलेटिंग एरिया आदि सभी को पुनर्विकसित किया गया है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि चूरू स्टेशन पर भवन के समरूप में बड़े स्तर पर सुधार कार्य, स्टेशन की ओर आने-जाने वाले मार्ग में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग प्रावधान किया गया है। बाउंड्री वॉल, सर्कुलेटिंग एरिया में सौंदर्यकरण, दोपहिया, चौपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग सुविधा, बुकिंग ऑफिस रिटायरिंग रूम आदि में सुधार, नए टॉयलेट ब्लॉक्स लगाए गए हैं।
उपरोक्त कार्यो के अलावा सौंदर्य वर्धन के लिए एलइडी लाइटिंग भी की गयी है। सभी सुविधाओं का दिव्यांगजनों तक पहुंच बनाने के लिए उपयुक्त साइनेज भी लगाया गया है । इस स्टेशन पर कला एवं संस्कृति का समन्वय करते हुए दीवारों एवं छतों पर आकर्षक पेंटिंग भी की गयी है l
इसके अलावा यात्री सूचना प्रणाली में सुधार हेतु के कोच गाइडेंस डिस्प्ले बोर्ड, मल्टीलाइन डिस्पले बोर्ड्स, सिंगल लाइन डिस्प्ले बोर्ड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, बड़े एलइडी स्क्रीन्स तथा जीपीएस आधारित डिजिटल क्लॉक भी लगाया गया है ।
स्टेशन की प्रकाश व्यवस्था, सुगम,निर्बाध एवं निरंतर तकनीकी रेल कार्यों के संचालन हेतु हरित ऊर्जा उत्पादन सोलर ऊर्जा प्लांट भी स्थापित किया जायेगा । इस हेतु लगभग 18 लाख की लागत से 40 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है। चूरू स्टेशन पर 10.68 करोड़ की लागत से 12 मीटर चौड़ा फुट ओवरब्रिज व लिफ्ट भी लगेगी । फुट ओवरब्रिज का 77 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है एवं शेष कार्य शीघ्रता से पूरा किया जा रहा है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन के पुनर्विकसित होने से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी,आवागमन सुगम होगा एवं पर्यटक भी लाभान्वित होंगे।
उल्लेखनीय है कि चूरू राजस्थान के ऐतिहासिक किले, भव्य भित्तिचित्रों वाली हवेलियाँ और वन्यजीव स्थलों के लिए प्रसिद्ध हैं। 1735 में बना चूरू किला इस बात के लिए मशहूर है कि घेराबंदी के दौरान यहां से चांदी के गोले दागे गए थे। शेखावाटी शैली में बनी यहां की हवेलियां में बारीक चित्रकारी और सैकड़ों खिड़कियां हैं। राजस्थानी और यूरोपीय वास्तुकला की झलक और शानदार शीशे का काम और पेंटिंग्स हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश