राजसी वैभव और लोक संस्कृति के संगम के बीच निकली बूढ़ी तीज माता की शाही सवारी
जयपुर, 16 अगस्त (हि.स.)। छोटी काशी जयपुर में रविवार को बूढ़ी तीज माता की शाही सवारी राजसी वैभव, लोक संस्कृति और नारी शक्ति के संगम के साथ निकली। सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी से शुरू हुई सवारी त्रिपोलिया गेट, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार होते हुए तालकटोरा स्थित पौंड्रिक पार्क पहुंची। सवारी के दर्शन के लिए परकोटे के बाजारों, हवेलियों, झरोखों और मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में शहरवासी, श्रद्धालु तथा देशी-विदेशी पर्यटक उमड़े। तीज माता के जयकारों और लोकगीतों से पूरा परकोटा गूंजता रहा।
सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में पूर्व राजपरिवार की महिला सदस्यों ने तीज माता की पूजा-अर्चना की। इसके बाद माता को करीब 400 किलो वजनी चांदी की पालकी में विराजमान कर शाही लवाजमे के साथ रवाना किया गया। त्रिपोलिया गेट पर पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने तीज माता की आरती की। यहां से शाही सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। छोटी चौपड़ पर उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी तथा जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा ने तीज माता की महाआरती की।
शाही सवारी में राजस्थान के विभिन्न अंचलों की लोक कलाओं का प्रदर्शन हुआ। करीब 175 लोक कलाकारों ने कालबेलिया, गैर, कच्छी घोड़ी, चरी-घूमर, चंग-ढप, मांगणियार गायन, भपंग, रावणहत्था, कठपुतली, बहरूपिया और मशक वादन की प्रस्तुतियां दीं। घोड़ों और ऊंटों से सजे शाही लवाजमे ने सवारी की भव्यता बढ़ाई। जेल बैंड और आरएसी बैंड की प्रस्तुतियों ने भी माहौल को आकर्षक बनाया।
इस बार शाही सवारी में नारी शक्ति का विशेष रंग दिखाई दिया। शौर्य सेवा संगठन की खुशी नरुका के नेतृत्व में बालिकाओं के समूह ने उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के निमंत्रण पर तलवारबाजी का प्रदर्शन किया। तीज उत्सव के बीच बालिकाओं के शौर्य प्रदर्शन ने राजस्थान की वीर परंपरा और महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया।
सवारी के दौरान सिल्वर मैन के नाम से प्रसिद्ध मोहम्मद जाफरी भी आकर्षण का केंद्र रहे। वे करीब 27 किलो वजनी और करीब दो करोड़ रुपये मूल्य के हीरे-मोती जड़ित चांदी के आभूषण पहनकर पहुंचे। बीकानेर से आए साढ़े तीन फीट लंबी दाढ़ी वाले रमेश व्यास और उनका समूह भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
छोटी चौपड़ के बाद सवारी गणगौरी बाजार पहुंची, जहां जयपुर व्यापार महासंघ की ओर से तीज माता पर पुष्पवर्षा की गई। सवारी के मार्ग में ड्रोन से भी पुष्पवर्षा की गई। महल-अटारियों, हवेलियों और झरोखों से लोगों ने पालकी के दर्शन किए। इसके बाद सवारी तालकटोरा स्थित पौंड्रिक पार्क पहुंची, जहां कला मेले और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां हुईं।
तीज उत्सव को डिजिटल माध्यम से भी व्यापक स्तर पर जोड़ा गया। शहर के 13 प्रमुख स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाकर शाही सवारी का लाइव प्रसारण किया गया। राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका के डिजिटल माध्यम से उत्तर अमेरिका में बसे प्रवासी राजस्थानियों तक भी शाही सवारी का सीधा प्रसारण पहुंचा। पर्यटन विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लाइव स्ट्रीमिंग की गई। दिल्ली से आए सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने भी जयपुर के तीज उत्सव को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा किया।
पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि तीज माता की शाही सवारी जयपुर की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है, जिसमें आस्था के साथ लोककला, संगीत, शौर्य और राजसी विरासत का संगम दिखाई देता है। डिजिटल माध्यम के जरिए इस परंपरा को देश-विदेश में बसे राजस्थानियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
शाही सवारी के दौरान त्रिपोलिया बाजार में बैरिकेड्स हटाकर कांवड़ यात्रियों के सुगम आवागमन की व्यवस्था भी की गई। लोकगीतों, शाही लवाजमे, तीज माता के जयकारों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच निकली सवारी ने जयपुर की सांस्कृतिक परंपरा को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश