बीकानेर में राजस्थानी भाषा को मान्यता देने की मांग
बीकानेर, 22 फरवरी (हि.स.)। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग को लेकर बीकानेर कचहरी परिसर में जारी धरने में रविवार को विभिन्न जनप्रतिनिधियों और भाषा समर्थकों ने भाग लिया। धरना राजस्थानी मोट्यार परिषद की ओर से आयोजित किया जा रहा है।
पूर्व सिंचाई मंत्री देवीसिंह भाटी ने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता देना प्रदेश के नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार दस करोड़ लोगों की जनभावनाओं की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि मान्यता मिलने से भाषा, संस्कृति और रोजगार के अवसरों को संरक्षण मिलेगा।
पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने कहा कि राजस्थानी भाषा का इतिहास समृद्ध रहा है और इसकी मान्यता के लिए आंदोलन होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में राजस्थान सरकार ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था और अब केंद्र सरकार को इस पर निर्णय लेना चाहिए।
धरने में परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शिवदान सिंह जोलावास, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. गौरी शंकर प्रजापत, बीकानेर संभाग अध्यक्ष डॉ. हरिराम बिश्नोई सहित विभिन्न पदाधिकारी और साहित्यकार मौजूद रहे। केंद्रीय साहित्य अकादमी से सम्मानित शंकर सिंह राजपुरोहित सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
आयोजकों के अनुसार उदयपुर, नागौर, बाड़मेर, सीकर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और जयपुर सहित विभिन्न जिलों से भाषा समर्थक धरने में शामिल हुए। वक्ताओं ने केंद्र सरकार से राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजीव