बीकानेर में पहली बार पंडित प्रदीप मिश्रा की मधुर वाणी से होगी शिवमहापुराण कथा

 


बीकानेर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। सनातन धर्म रक्षा समिति बीकानेर द्वारा बीकानेर की पावन धरा पर आगामी 11 मार्च से 17 मार्च 2027 तक सात दिवसीय दिव्य एवं भव्य धार्मिक आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में पहली बार प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी सीहोर वाले की मधुर वाणी से श्री शिवमहापुराण कथा का आयोजन होगा। इसके साथ ही 5151 कुण्डीय लक्ष चंडी महायज्ञ का भी आयोजन किया जाएगा। समिति द्वारा इस धार्मिक आयोजन को लेकर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।

सनातन धर्म रक्षा समिति बीकानेर के संस्थापक सुरेन्द्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि समिति द्वारा लगातार चौथी बार बीकानेर की पावन धरा पर दिव्य एवं भव्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण आयोजन निर्धारित किया गया है। आज आयोजित कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा तय होने के साथ ही समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार श्री शिवमहापुराण कथा के साथ 5151 कुण्डीय लक्ष चंडी महायज्ञ का आयोजन विशेष आकर्षण रहेगा। महायज्ञ में काशी के विख्यात विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए जाएंगे।

राजपुरोहित ने बताया कि इस आयोजन में श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी विधुशेखर भारती जी महाराज तथा ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के बीकानेर आगमन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। संत-महात्माओं के सानिध्य में होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए धर्म, अध्यात्म और सनातन संस्कृति से जुड़ने का विशेष अवसर बनेगा।

समिति संस्थापक ने बताया कि आगामी 12 नवंबर को भूमि पूजन के साथ कार्यक्रम की तैयारियों का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। आयोजन को सुव्यवस्थित बनाने के लिए समिति की शीघ्र ही बैठक आयोजित होगी, जिसमें अलग-अलग टीमों का गठन कर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। बीकानेर शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी आयोजन की व्यवस्थाओं और जनसंपर्क की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। इस बार कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की मुख्य जिम्मेदारी समिति अध्यक्ष कैलाश छंगाणी एवं महिला अध्यक्ष जयश्री भाटी के कंधों पर रहेगी। दोनों पदाधिकारियों के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें बनाकर आयोजन की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं के सहयोग, पंजीकरण और जनसंपर्क संबंधी कार्यों को गति दी जाएगी।

राजपुरोहित ने बताया कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की जाएंगी। लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं के लिए टेंट एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने की योजना है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने की उचित व्यवस्था करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि सभी श्रद्धालु सुविधापूर्वक कथा श्रवण एवं धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले सकें।

श्री शिवमहापुराण कथा एवं महायज्ञ में यजमान बनने के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए 1 नवंबर 2026 से 24 जनवरी 2027 तक पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड एवं फोटो आवश्यक रहेंगे। समिति की ओर से पंजीकरण संबंधी विस्तृत जानकारी और आगे की प्रक्रिया श्रद्धालुओं तक पहुंचाई जाएगी।

राजपुरोहित ने बताया कि 5 नवंबर से कार्यक्रम के निमंत्रण अभियान की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए विशेष टीम गठित कर देश के गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, राजनेताओं, धर्माचार्यों, संत-महात्माओं एवं समाजसेवियों को निमंत्रण पत्र और पीले चावल भेजे जाएंगे। इस बार निमंत्रण अभियान में विशेष रूप से श्रीफल के साथ हरिद्वार से मंगवाए रुद्राक्ष के पौधे भेंट कर कार्यक्रम में पधारने का आमंत्रण देने की योजना बनाई गई है। इस पहल के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा।

समिति संस्थापक ने कहा कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग का सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा। इसके लिए समाजसेवियों, भामाशाहों, धर्मप्रेमियों और श्रद्धालुओं को अभियान से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। समिति की टीमें जनसंपर्क के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक आयोजन की जानकारी पहुंचाएंगी और उन्हें सेवा कार्यों में सहभागी बनने के लिए प्रेरित करेंगी। श्रद्धालुओं तक कार्यक्रम की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए श्री शिवमहापुराण कथा का आस्था चैनल पर सीधा प्रसारण किया जाएगा, जिससे बीकानेर के साथ देश के अन्य क्षेत्रों में रहने वाले श्रद्धालु भी कथा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

राजपुरोहित ने बताया कि कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा तय होते ही समिति की टीम सक्रिय हो गई है। आगामी दिनों में बैठकें आयोजित कर व्यवस्थाओं को अंतिम स्वरूप दिया जाएगा। समिति का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव