पांच साै टन सालिड वेस्ट का निस्तारण करने की तैयारी में निगम

 


जयपुर, 10 जुलाई (हि.स.)। नगर निगम शहर को साफ और स्वच्छ बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसी दिशा में नगर निगम सालिड वेस्ट के निस्तारण के लिए नया प्लांट बनाने की योजना पर काम कर रहा है। हाल में निगम द्वारा कचरा निस्तारण की दिशा में झालाना में 150 टन की क्षमता वाला एक हाईटेक मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन भी शुरू किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर निगम जयपुर में प्रतिदिन लगभग 1700 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से निगम की वर्तमान प्रसंस्करण क्षमता लगभग 600 मीट्रिक टन प्रतिदिन है, शेष कचरा शहर के बाहरी इलाकों में स्थित डंपिंग यार्ड (मथुरादासपुरा और सेवापुरा) में भेजा जाता है। सालिड वेस्ट के निस्तारण की क्षमता बढ़ाने की दिशा में निगम नया प्लांट बनाएगा। इस प्लांट को सेवापुरा में बनाया जाएगा। इस प्लांट में 500 टन सालिट वेस्ट का निस्तारण किया जा सकेगा। इससे निगम की सालिड वेस्ट के निस्तारण की क्षमता और मजबूत हो जाएगी। नए प्लांट के माध्यम से रोजाना 500 टन तक सालिड वेस्ट (ठोस कचरा) का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सकेगा।

एडिशनल इंजीनियर एस के वर्मा ने बताया कि कचरा निस्तारण काे लेकर प्लांट बनाने की याेजना प्रस्तावित है। इसकाें लेकर आगामी दिशा में रुपरेखा तैयार की जाएगी।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इसके अलावा नगर निगम बायो वेस्ट के निस्तारण लेकर पीपीपी मोड पर एक प्लांट बनाने जा रहा है, जहां पर इससे कंप्रेस्ड बायो गैस बनाई जाएगी। इसका प्लांट भी लांगडियावास में बनाया जा सकता है। बायो-वेस्ट या जैव-चिकित्सा कचरा वह खतरनाक अपशिष्ट है, जो अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं या पशु चिकित्सालयों में इलाज, जांच और टीकाकरण के दौरान निकलता है। इसमें इस्तेमाल की गई सुई, रुई, पट्टी, खून से सनी सामग्री, मानव अंग और दवाइयां शामिल होती हैं, जिनसे संक्रमण और गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा रहता है।

पर्यावरण नियमों के अनुसार इस कचरे को अलग-अलग रंग के डिब्बों या थैलियों में इकटठा किया जाता है। जयपुर में अस्पतालों से रोजाना औसतन 20 से 25 टन बायोमेडिकल वेस्ट (जैव चिकित्सा कचरा) निकलता है। सरकारी और निजी अस्पतालों में औसतन प्रतिदिन 1 से 2 किग्रा कचरा प्रति बेड (बिस्तर) उत्पन्न होता है।

वहीं दूसरी ओर नगर निगम सीएनडी वेस्ट से ब्रिक्स सहित अन्य सामान बना रहा है। सीएनडी वेस्ट का प्लांट लांगडियावास में चल रहा है। पुराने मकानों को तोडऩे के बाद जो मलबा बचता है उसका उपयोग इंटरलॉकिंग टाइल्स और ब्लॉक्स बनाने के काम में लिया लिया जा रहा है। शिवालिक सिलिका और अर्घ इंजीनियरिंग कंपनी को यह जमीन 20 साल के लिए दी गई है। सीएनडी वेस्ट के लिए कंपनी प्रति टन निगम से 390 रुपये का भुगतान लेगी, जो मलबे को उठाने का खर्च होगा। रोजाना 300 टन मलबे का कलेक्शन, ट्रांसपोर्टेशन और प्रोसेसिंग की जाएगी। टाइल्स, इंटर लॉकिंग और एम सेंड को भी निगम भुगतान कर उपयोग में ले सकेगा। इस प्लांट में रोजाना 300 टन से अधिक कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। लांगडियावास में चल रहे प्लांट में हर दिन नगर निगम 900 टन कचरे से 230 मेगावाट बिजली उत्पादित कर रहा है। प्लांट की क्षमता 288 मेगावाट प्रतिदिन है। यहां से जयपुर डिस्कॉम को 7.31 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली बेची जा रही है। इस प्लांट से निकलने वाले पानी को भी साफ कर पेड़-पौधों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, यानी कि इस मल्टीपरपज प्रोजेक्ट से बिजली और पानी मिलने के साथ-साथ आमदनी भी हो रही है। इस रेवेन्यू को निगम के विकास कार्यों पर खर्च किया जा रहा है। कचरा निस्तारण करने के लिए एमआरएफ प्लांट बन रहा है। इसकी क्षमता 300 टन प्रतिदिन की होगी। इसी तरह का एक प्लांट 350 टन कचरे को नियमित निस्तारित भी कर रहा है। यहां कचरे के छंटनी के बाद ईंधन के रूप में सीमेंट फैक्ट्री में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश