निगम पर बरसेगी लक्ष्मी, दाै से अधिक विज्ञापन साइटाें से निगम को मिलेगा 40 करोड़ से अधिक का राजस्व

 


जयपुर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। नगर निगम पर आने वाले समय में धन लक्ष्मी की मेहर होगी। नए परिसीमन में शामिल इलाकों में निगम आमजन और व्यापारियों के लिए 200 से अधिक नई विज्ञापन साइट बनाएगी। इन विज्ञापन साइट्स से निगम को करीब 40 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार निगम प्रशासन के लिए नई साइट्स के लिए जगह चिन्हित कर ली है और दीपावली से पहले यहां पर विज्ञापन साइट तैयार कर दी जाएगी। इसके बाद आमजन और व्यापारी यहां पर अपने विज्ञापन निगम को निर्धारित शुल्क देकर लगा सकेंगे। एक विज्ञापन साइट के लिए 20 लाख रुपये में एक माह के लिए आमजन या व्यापारियों को मिल सकेंगी। हालांकि विकास कार्यो सहित अन्य खर्चो के लिए नगर निगम जयपुर हमेशा से ही सरकार पर निर्भर रहा है, जबकि दूसरे राज्यों में निगम के राजस्व के स्वयं के स्त्रोत बना रखे है। लेकिन जयपुर नगर निगम सहित प्रदेश की अन्य नगर निकाय इस मामले में पूरी तरह से पिछडे हुए है। इस दिशा में नगर निगम सहित अन्य नगर निकायों को काम करने की जरुरत है और सरकार को भी इन संस्थानों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में छूट देने की जरुरत है।

नगर निगक के उपायुक्त राजस्व प्रथम नवीन कुमार ने बताया कि परिसीमन के बाद शामिल इलाकों में निगम की नई विज्ञापन साइट्स बनाई जा रही है। यहां पर करीब 200 विज्ञापन साइट बनेगी। इससे निगम को अच्छा राजस्व मिलेगा। गलत नीतियों से निगम का खजाना खाली राज्य सरकार के गलत नीति निर्धारण के चलते नगर निगम का खजाना खाली है और उसे शहर में विकास से लेकर अपने खर्चे के लिए सरकार के आगे हाथ फैलाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

हालांकि निगम का खजाना खाली रहने के मामले मेें कुछ हद तक अधिकारी भी जिम्मेदार है। नगर निगम आमजन से नगरीय कर वसूलता है। इसके अलावा उसके खजाने में होर्डिंग सहित कुछ अन्य मद से ही आमदनी होती है, जबकि गुजरात के सूरत में निगम द्वारा करीब 9 प्रकार के कर वसूल किए जाते है। इसके अलावा कर वसूलने के लिए बनी नीति का भी विकेंद्रीकरण किया गया है। जिसका लाभ आम व खास को अलग मिलता है। गुजरात के तर्ज पर राजस्थान में सरकार निगम को टैक्स वसूली करने की परमिशन दे तो शहर के विकास में चार चांद लग सकते है। इंदौर में भी करों का निर्धारण सूरत जैसा ही है। हालांकि राजस्थान सरकार की उदारता की नीति महंगाई में आमजन को राहत प्रदान करती है लेकिन वह शहर के विकास और सुविधाओं को लेकर पिछड़ापन की ओर धकेल रही है।

जयपुर नगर निगम के पास वर्ष 2024-2025 में केवल 1.66 लाख कर योग्य सम्पत्तियां है। जबकि सूरत नगर निगम के पास कर योग्य 24.20 लाख सम्पत्तियां है। नगर निगम ने कर वसूलने और सम्पत्तियों की पहचान के लिए एक कम्पनी को टेंडर दे रखा है। लेकिन कम्पनी जयपुर में कर वसूलने योग्य सम्पत्तियों की पहचान नहीं कर पाई है फिर भी निगम अधिकारी कम्पनी पर पूरी तरह से मेहरबान है और कमाई का एक मोटा हिस्सा कम्पनी को दिया जा रहा है। 2024-2025 में निगम ने कुल 140 करोड़ रुपए का कर संग्रहण किया है। वहीं दूसरी ओर सूरत नगर निगम द्वारा 1720 करोड़ रुपए से अधिक का कर संग्रहण किया गया। सूरत नगर निगम को प्रोपर्टी टैक्स की दरों एवं उनके नियमों में संशोधन करने का अधिकार है लेकिन राजस्थान में यह अधिकार केवल सरकार के पास है। वहीं राजस्थान के नगर निकायों में 300 वर्गगज क्षेत्रफल से कम की आवासीय सम्पत्तियां, 100 वर्गगज या 900 वर्गफीट से कम की व्यावसायिक एवं संस्थानिक सम्पत्तियां, 1500 वर्गफीट क्षेत्रफल से कम के आवासीय फ्लेट, समस्त कृषि भूमि, रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्थित समस्त औद्योगिक ईकाइयां एवं वर्क शॉप, भूतपूर्व सैनिको, भूतपूर्व सैनिकों की विधवाओं, वीरगति प्राप्त सैनिक परिवार एवं उन पर आधारित आश्रित माता-पिता एवं बच्चों को एक रिहायशी मकान में छूट का प्रावधान किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश