तुलसी आँगन की मुझको बनाया ही क्यों,मन के मधुवन में मुझको सजाया ही क्यों.....

 


धौलपुर में मीरा साहित्य संगम ने आयोजित किया कवि सम्मेलन

धौलपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय मीरा सााहित्य संगम धौलपुर के तत्वावधान में गुरूवार रात को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन में कवियों ने देश के मौजूदा हालात,राजनीति,भ्रष्टाचार सहित ओज एवं श्रंगार की रचनाओं की प्रस्तुति दी।

आयोजन के मुख्य अतिथि डाॅ. भूपेन्द्र कौशिक ने कहा कि भारतीय साहित्य एवं संस्कृति में कविता का महत्वपूर्ण स्थान है। अखिल भारतीय मीरा साहित्य संगम द्वारा काव्य चेतना के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। कवि सम्मेलन का आगाज गीतकार बाबूलाल सागर की सरस्वती वंदना से हुआ। कवयित्री रजनी शर्मा मृदुल ने श्रंगार एवं विरह को अपने काव्य का विषय बनाते हुए रचना तुलसी आँगन की मुझको बनाया ही क्यों, मन के मधुवन में मुझको सजाया ही क्यों...प्रेम करके मुझे क्यों भुला ही दिया,आपने मुझको दिल में बसाया ही क्यों की मनोहारी प्रस्तुति दी।

कवि सम्मेलन के संयोजक तथा अखिल भारतीय हीरा साहित्य संगम के संस्थापक विकल फरूर्खावादी ने अपनी चर्चित प्रतिनिधि रचना ’’चाहता हूॅ कि मुझे और सताया जाये, अपराध क्या है मेरा ये ना बताया जाये प्रस्तुत की,जिसे श्रोताओं ने करतल ध्वनि से सराहा। व्यंग्यकार मनोज सिंघल बैचेन ने समाज में निरन्तर गिर रहे संस्कारों ध्यान में रखते हुये अपनी रचना ’’चारों तरफ गिरावट है, बडे पतन की आहट है, रिश्ते हुये कसैले भारी, हर दिल में घबराहट है’’ की प्रस्तुति दी। गीतकार सुरेन्द्र शर्मा ने समाज के वर्तमान हालात पर गीत ’’ सत्य पहचानियें कुछ तो सच बोलिएं, कैद खुशियां हुई कुन्डिया खोलियें’’ प्रस्तुत किया। कवि सम्मेलन में नन्दिनी शर्मा केसरी ’’प्रेम के दीप मैं भी जलती रही, वक्त-वेवक्त ही मुस्कुारती रही’’ शीर्षक से एक सुमधुर गीत प्रस्तुत किया। कवि सम्मेलन में राकेश दीक्षित,प्रेम प्रसून एवं आकाश राजा सहित अन्य ने भी काव्यपाठ किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप