डिजिटल हेल्थ सिस्टम से बदली तस्वीर: प्रदेश में 6.82 करोड़ से अधिक आभा आईडी, सेवाएं हुई आसान

 


जयपुर, 29 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश के अस्पतालों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) और इंटिग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम (आईएचएमएस) का तेजी से विस्तार हो रहा है। इन तकनीकी नवाचारों से मरीजों को रजिस्ट्रेशन से लेकर उपचार, दवा वितरण और लैब रिपोर्ट तक की सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो रही हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को व्यापक स्तर पर लागू किया गया है। अब तक 19 हजार से अधिक सरकारी और 24 हजार से अधिक निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में किया जा चुका है। वहीं 85 हजार से अधिक सरकारी स्वास्थ्यकर्मियों और 16 हजार से अधिक निजी क्षेत्र के कार्मिकों का पंजीकरण हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री में किया गया है।

उन्होंने बताया कि राज्य में 24,546 से अधिक सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थान डिजिटल मिशन के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। डिजिटल हेल्थ इंसेंटिव स्कीम के तहत स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक करने पर प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है, जिसके अंतर्गत अब तक 5,948 सरकारी संस्थान और 188 निजी संस्थान पंजीकृत हो चुके हैं। इन संस्थानों द्वारा कुल 19.5 करोड़ रुपये से अधिक का प्रोत्साहन अर्जित किया गया है।

राज्य के 5 हजार से अधिक राजकीय चिकित्सा संस्थानों में आईएचएमएस सॉफ्टवेयर संचालित किया जा रहा है, जिससे मरीजों के पंजीकरण, दवा प्रबंधन और वितरण प्रणाली को सरल बनाया गया है। साथ ही एडमिशन-डिस्चार्ज और लैब मॉड्यूल के माध्यम से मरीजों की रिपोर्ट और उपचार संबंधी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने बताया कि एबीडीएम के तहत प्रत्येक नागरिक की 14 अंकों की यूनिक आभा आईडी बनाई जाती है, जिसमें मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री सुरक्षित रहती है। डॉक्टर मरीज की अनुमति से इस डेटा को देखकर बेहतर उपचार प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आईएचएमएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) को आभा आईडी से जोड़ा जा रहा है, जिससे कागजी प्रक्रिया में कमी आई है और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ी है। डैशबोर्ड और एनालिटिक्स के जरिए सरकार को नीतियां बनाने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिल रही है।

राज्य में अब तक 6 करोड़ 82 लाख से अधिक नागरिकों की आभा आईडी बनाई जा चुकी है, जिससे राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। वहीं 5 करोड़ 43 लाख से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 3 करोड़ 54 लाख रिकॉर्ड आईएचएमएस के माध्यम से बनाए गए हैं। इसके अलावा पीसीटीएस सॉफ्टवेयर को भी जल्द ही एबीडीएम के अनुरूप बनाया जा रहा है, जिससे गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड सीधे मोबाइल पर उपलब्ध हो सकेंगे। इस दिशा में अब तक 28 हजार से अधिक महिलाओं की नई आभा आईडी बनाई जा चुकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव