ट्रेन में मिडिल बर्थ को लेकर रेलवे की एडवाइजरी जारी
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही खोलने का नियम, विवाद होने पर टीटीई करेगा नियमों की पालना सुनिश्चित
जोधपुर, 11 मई (हि.स.)। उत्तर पश्चिम ने ट्रेनों में आरक्षित श्रेणी के कोचों में मिडिल बर्थ के उपयोग को लेकर यात्रियों के लिए फिर से एडवाइजरी जारी की है। मंडल प्रशासन ने यात्रियों से रेलवे बोर्ड के निर्धारित नियमों की पालना करते हुए शांतिपूर्ण एवं निर्विवाद यात्रा सुनिश्चित करने में सहयोग की अपील की है।
रेलवे बोर्ड के कमर्शियल सर्कुलर संख्या 60/2017 के अनुसार आरक्षित कोचों में मिडिल बर्थ केवल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही खोली जा सकती है। सुबह 6 बजे के बाद मिडिल बर्थ को बंद रखना अनिवार्य है ताकि लोअर बर्थ पर बैठे यात्री आराम से बैठ सकें। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव ने बताया कि कई बार यात्रियों के बीच मिडिल बर्थ को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में टीटीई को रेलवे के आधिकारिक नियम लागू कराने का अधिकार है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान आपसी सहयोग और सौहार्द बनाए रखें तथा बीमार, दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक एवं गर्भवती महिलाओं जैसे जरूरतमंद यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखें।
यात्रियों के अनुसार लंबी दूरी की ट्रेनों में अक्सर दिन के समय भी मिडिल बर्थ खुली रहने से अन्य यात्रियों को बैठने में परेशानी होती है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को लोअर बर्थ पर बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। कई यात्रियों ने कहा कि रेलवे की यह एडवाइजरी यात्रियों के बीच अनावश्यक विवाद कम करने और यात्रा को अधिक व्यवस्थित बनाने में मददगार साबित होगी। उनका कहना है कि कई बार जानकारी के अभाव में यात्री नियमों को लेकर बहस करने लगते हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करना सकारात्मक कदम है तथा समय-समय पर जारी की जाने वाली इस तरह की गाइडलाइन की रेल यूजर्स को गंभीरतापूर्वक पालना करनी चाहिए।
भारतीय रेलवे में सफर के दौरान लोअर, मिडिल, अपर एवं साइड बर्थ के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम निर्धारित हैं, ताकि सभी यात्रियों को सुविधा मिल सके। नियमों के अनुसार दिन के समय सीट साझा करने की व्यवस्था लागू रहती है, जबकि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक आरक्षित यात्री को अपनी बर्थ पर सोने का अधिकार होता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश