टेट अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का धरना-प्रदर्शन
जोधपुर, 18 जून (हि.स.)। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षक संगठन आंदोलनरत हैं। इस मुद्दे को लेकर आज अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के आह्वान पर शिक्षकों ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना दिया और रैली निकालकर जिला प्रशासन को प्रधानमंत्री व शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
महासंघ के जिलाध्यक्ष भरतसिंह चौधरी और जिलामंत्री सुभाष बिश्नोई ने बताया कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय प्रभावी नियमों एवं पात्रताओं के अनुरूप पूर्णत: वैध थीं। बाद में निर्धारित पात्रता अथवा योग्यता मानदण्डों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता। दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव, कार्यकुशलता एवं योगदान को समुचित महत्व दिया जाना चाहिए। लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता एवं शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगा। संसद एवं केंद्र सरकार आवश्यक विधायी अथवा नीतिगत हस्तक्षेप कर इस वर्ग को उचित संरक्षण प्रदान कर सकती है।
उन्होंने बताया कि ज्ञापन में 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने, ऐसे शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान करने, आवश्यकता होने पर संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत प्रदान करने और सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस एवं असुरक्षा की स्थिति का तत्काल निराकरण करने की मांग की गई है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश