जोधपुर मे गणगौरी तीज का उत्साह चरम पर : शनिवार को मनाई जाएगी गणगौरी तीज

 


जोधपुर, 20 मार्च (हि.स.)। मारवाड़ की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला गणगौर का त्योहार चैत्र शुक्ल तीज शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन होली के दूसरे दिन से प्रारंभ हुआ गवर पूजन का समापन किया जाएगा। इससे पहले तीज की पूर्व संध्या पर आज लोटियों के मेले की धूम रही। गवर पूजने वाली तीजणियां विभिन्न क्षेत्रों से पूरे एक पखवाड़े बाद गवर माता को पानी पिलाने के लिए विभिन्न धातुओं के पात्र लेकर पवित्र जलाशयों पर गई और लोटियों को जल से भरने के बाद समूह के रूप में शीश पर गाजे-बाजों संग गवर पूजन स्थल पर गवर माता को पानी पिलाने की रस्म पूरी की।

गणगौर समिति की ओर से निकाली जाने वाली शोभायात्रा के लिए पार्वती रूपी गवर माता को विशेष रूप से स्वर्णाभूषणों से सजाया जाएगा। शोभायात्रा शनिवार शाम पांच बजे राखी हाउस से निकाली जाएगी। राखी हाउस से शुरू होने वाली यह शोभायात्रा सिरे बाजार, पुगलपाड़ा, कबूतरों का चौक, नृसिंह थड़ा होकर जालोरीबारी, जालोरी गेट से निकलेगी। यहां से पुष्टिकर स्कूल, खांडा फलसा, आडा बाजार, कुम्हारिया कुआं, सर्राफा बाजार, मिर्ची बाजार, सिटी पुलिस थाना, कटला बाजार होते हुए घंटाघर प्रांगण पहुंचेगी। जलग्रहण के बाद गणगौर माता राखी हाउस लौटकर विराजमान होंगी। इस मौके पर माता को करीब दो किलो सोने के जेवर पहनाए जाएंगे। जानकारी के अनुसार इनकी कीमत 2 करोड़ रुपये से ऊपर है।

बता दे कि माता गणगौर की पूजा चैत्र कृष्ण प्रथम यानी धुलंडी से शुरू होकर चैत्र शुक्ल तृतीया यानी तीसरे नवरात्र को पूरी होती है। यह 16 दिन तक चलने वाली गणगौर पूजा यूं तो राजस्थान का मुख्य पर्व है, लेकिन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात के कुछ इलाकों में भी यह त्योहार मनाया जाता है। गणगौर को गौरी तृतीया भी कहते हैं। अखंड सौभाग्य के लिए मनाया जाने वाला गणगौर पर्व मनाने के लिए कुंवारी लड़कियां और सुहागिन महिलाएं घर-घर में गणगौर यानी शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। इसमें ईसर और गौर यानी शिव-पार्वती की मिट्टी की मूर्ति बनाकर सोलह शृंगार कर सजाया जाता है। यह पूजा 16 दिन तक लगातार चलती है।

गणगौर पर्व के तहत आयोजनों ने शहर के सांस्कृतिक रंग और परंपराओं की जीवंतता को फिर से सजीव कर दिया है। महिलाएं प्रतिदिन पारंपरिक वेशभूषा में सोलह श्रृंगार कर गणगौर माता की विधिवत पूजा-अर्चना कर रही हैं। लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियां पूरे वातावरण को भक्तिमय बना रही हैं। इसी कड़ी में डोडीदारों का मोहल्ला स्थित पीपलिया मंदिर की महिला मंडल समिति ने गणगौर महोत्सव को लोक-भाव और पारंपरिक आभा के साथ जीवंत कर दिया। वहींजीनगर पंचायत समाज घाटी में फगला घुडला का आयोजन पूरे चालीस वसंतों से चल रहा है। स्व. मैनाबाई चौहान से शुरू हुई इस लोकधारा को आज बैनसाबाई शांति चितारा, सीता-सांखला, गीता-सांखला, तारा-सांखला, जमना चौहान, शांति सोलंकी, उषा डाबी, मंजू गोयल, वैजयंती माला, छोटी चितारा, ललिता चौहान, धनीबाई और निर्मला गोयल सहित महिलाएं आगे बढ़ा रही हैं। इधर बिड़ला स्कूल के पास कुलदीप विहार में गणगौर का त्यौहार बड़ी धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर माता गौरी और शिव की विधि विधान से पूजा अर्चना की और अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना की। महिला मंडल की भारती राठी ने बताया कि कार्यक्रम में महिलाओं ने सफेद वस्त्र धारण कर मां गौरी और ब्रह्मचारिणी मां की अर्चना कर अपने परिवार की खुशहाली मांगी, इसके साथ ही महिलाओं ने ईसर गोरी का रूप धारण कर वातावरण को भक्ति और सांस्कृतिक वातावरण के रंग में रंग दिया।

माहेश्वरी महिला मंडल पश्चिम क्षेत्र द्वारा हर वर्ष की भांति चैत्र शुक्ल गणगौरी तीज का 20वां सामूहिक उद्यापन 21 मार्च को रातानाडा स्थित जनोपयोगी माहेश्वरी भवन में आयोजित होगा।

सचिव विजय लक्ष्मी भूतड़ा ने बताया कि अध्यक्ष अलका जौहरी, कोषाध्यक्ष निशा पुंगलिया, उपाध्यक्ष कुमुद भूतड़ा, सहसचिव भारती राठी, निवर्तमान अध्यक्ष सुनीता जैसलमेरिया, निवर्तमान जिलाध्यक्ष उषा बंग, संगीता राठी, योगिता मालपानी, कौशल्या, प्रभा माहेश्वरी, सीमा, संतोष, दमयंती, प्रमिला, रेनू सहित महिला मंडल की मेजबानी में कमला नेहरू नगर स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजन के बैनर का विमोचन किया गया और तैयारियों के संदर्भ में चर्चा कर विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई।

अध्यक्ष अलका जौहरी ने बताया कि 21 मार्च को समाजसेविका आशा फोफलियां, निवर्तमान अध्यक्ष सुनीता जैसलमेरियां व महिला मंडल की मेजबानी में सुबह 9 बजे लोटिया के साथ शोभायात्रा, 10 बजे गणगौर पूजन और दोपहर 12 बजे से गणगौर प्रसादी का आयोजन होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश