चंबल के बीहड़ों तक पहुंची स्वास्थ्य सेवा, हाई रिस्क गर्भवतियों का घर पर हुआ उपचार
धौलपुर, 26 जुलाई (हि.स.)। धौलपुर जिले के चंबल के दुर्गम बीहड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने दो हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं तक घर-घर पहुंचकर उपचार उपलब्ध कराते हुए सुरक्षित मातृत्व की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है। जिला प्रशासन की निगरानी और चिकित्सा विभाग के प्रयासों से दोनों महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है तथा वे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की श्रेणी से बाहर आ गई हैं।
राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा से सटे सरमथुरा ब्लॉक के गौलारी और मदनपुर गांव कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित आवागमन के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र माने जाते हैं। नियमित प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के दौरान शिवदेई का हीमोग्लोबिन 5.9 ग्राम तथा मुनेश बाई का 5.5 ग्राम पाया गया, जिसके बाद दोनों को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में चिन्हित किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्मसिंह मीणा के निर्देश पर एएनएम, आशा सहयोगिनियों और चिकित्सा अधिकारियों ने कई बार महिलाओं और उनके परिजनों को उपचार के लिए प्रेरित किया। हालांकि सामाजिक संकोच और मध्यप्रदेश सीमा से सटे क्षेत्र में 108/104 एम्बुलेंस सेवा से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण दोनों महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थान तक लाना संभव नहीं हो सका।
ऐसी स्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सरमथुरा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. गोरेलाल मीणा ने स्वयं स्वास्थ्य टीम के साथ गांव पहुंचकर दोनों महिलाओं का घर पर उपचार किया। उन्होंने 104 एम्बुलेंस के माध्यम से मौके पर पहुंचकर चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज इंजेक्शन लगाए और उपचार सुनिश्चित किया।
उपचार के बाद दोनों महिलाओं की नियमित निगरानी और फॉलोअप जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार समय पर उपचार और निरंतर चिकित्सकीय देखरेख से दोनों के हीमोग्लोबिन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी से बाहर आ गईं। इससे मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा काफी कम हुआ तथा सुरक्षित प्रसव की संभावना बढ़ी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप