गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए आयुर्वेद के मूल ग्रंथों का एकीकरण आवश्यक: प्रो. खांडेल

 


जोधपुर, 07 सितम्बर (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में संस्थागत नैतिकता समिति के उद्घाटन समारोह का आयोजन कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ल के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ल, संस्थागत नैतिकता समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर श्रीकृष्ण शर्मा खांडल, आईईसी सदस्य प्रोफेसर एलएन बुनकर सहित देश के प्रख्यात विषय विशेषज्ञ, महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रोफेसर राजाराम अग्रवाल, डीन अकादमिक प्रोफेसर गोविंद प्रसाद गुप्ता, पूर्व डीन अकादमिक प्रोफेसर महेंद्र कुमार शर्मा, उपकुलसचिव डॉ. मनोज अधलखा तथा संस्थागत नैतिकता समिति के समन्वयक प्रोफेसर हरीश कुमार सिंघल सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद के 14 विभागों के पीएचडी एवं एमडी आयुर्वेद के शोध प्रस्तावों का अनुमोदन होगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थागत नैतिकता समिति के सदस्य सचिव प्रोफेसर दिनेश द्वारा औपचारिक स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने उपस्थित अतिथियों एवं संकाय सदस्यों का स्वागत करते हुए संस्थागत नैतिकता समिति की भूमिका तथा शोध कार्यों में नैतिक मानकों के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर संस्थागत नैतिकता समिति (इंटिट्यूशनल एथिक्स कमिटी )के अध्यक्ष प्रोफेसर श्रीकृष्ण शर्मा खांडेल ने शोध की आवश्यकता एवं महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ आयुर्वेद के शास्त्रीय सिद्धांतों एवं मूल ग्रंथों का समुचित एकीकरण आवश्यक है।

उन्होंने शोध कार्यों में वैज्ञानिक पद्धति, नैतिक मूल्यों, शोध की गुणवत्ता तथा शोध प्रतिभागियों के अधिकारों एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्थागत नैतिकता समिति विश्वविद्यालय में किए जाने वाले शोध कार्यों को निर्धारित नैतिक एवं वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ल ने विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण एवं नैतिक शोध को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि शोध केवल नवीन ज्ञान के सृजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज एवं मानव स्वास्थ्य के हित में उपयोगी एवं प्रमाण-आधारित ज्ञान विकसित करने का महत्वपूर्ण साधन है। कार्यक्रम के अंत में संस्थागत नैतिकता समिति के समन्वयक प्रोफेसर हरीश कुमार सिंघल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश