कृषि क्षेत्र में 30 से अधिक संस्थाओं से होगा एमओयू, किसानों की आय बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
जयपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। राज्य सरकार किसानों की आय में वृद्धि, कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से कृषि क्षेत्र में कार्यरत 30 से अधिक प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठनों, सिविल सोसायटी संस्थाओं, अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों तथा एग्रीटेक कंपनियों के साथ गैर-वित्तपोषित समझौता ज्ञापन (एमओयू) करेगी। इन समझौतों के माध्यम से कृषि एवं उद्यानिकी विभाग विभिन्न संस्थाओं की विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमता का उपयोग करते हुए विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देगा।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि शुक्रवार को पंत कृषि भवन, जयपुर में एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट, मृदा उर्वरता में कमी, उत्पादन लागत में वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए सरकार, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों और किसानों के बीच प्रभावी साझेदारी आवश्यक है।
गोयल ने बताया कि इसी उद्देश्य से 12 जनवरी 2026 को राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिसमें विशेषज्ञ संस्थाओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर सहयोग का यह मॉडल तैयार किया गया। इसके तहत विभिन्न संस्थाओं के साथ गैर-वित्तपोषित एमओयू किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इन समझौतों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। सहयोगी संस्थाएं अपनी विशेषज्ञता, तकनीकी अनुभव और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेंगी। इससे योजनाओं का लाभ अधिक व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचेगा और कृषि विकास को नई गति मिलेगी।
एमओयू के तहत प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि प्रणाली, मृदा एवं जल संरक्षण, कृषि विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार, डिजिटल कृषि, किसान प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, महिला और युवा किसानों के सशक्तिकरण तथा कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा।
विभिन्न सहयोगी संस्थाएं अपनी विशेषज्ञता के अनुसार प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विस्तार, जल संरक्षण, सामुदायिक प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि नवाचार, एग्रीटेक समाधान, डिजिटल प्लेटफॉर्म, किसान प्रशिक्षण, बाजार संपर्क, मूल्य संवर्धन, जलवायु अनुकूल तकनीकों तथा अनुसंधान आधारित कृषि मॉडल विकसित करने में विभाग के साथ सहयोग करेंगी।
कृषि विभाग का मानना है कि यह साझेदारी राजस्थान में कृषि विकास का नया मॉडल स्थापित करेगी। इससे आधुनिक तकनीकों का तेजी से प्रसार होगा, विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचेगा तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ टिकाऊ और लाभकारी कृषि व्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा। यह पहल प्रदेश में कृषि नवाचार, प्राकृतिक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश