करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है राजस्थान की मातृभाषा : भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग
बीकानेर, 03 अगस्त (हि.स.)। बार एसोसिएशन, बीकानेर ने राजस्थान की मातृभाषा राजस्थानी को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम जिला कलक्टर, बीकानेर के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित ने बताया कि ज्ञापन में राष्ट्रपति का ध्यान राजस्थान विधानसभा के 11वें कार्यकाल के 11वें एवं अंतिम सत्र में दिनांक 28 मई, 2003 को सर्वसम्मति से पारित उस शासकीय संकल्प की ओर आकर्षित कराया गया है, जिसमें राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की अनुशंसा भारत सरकार को भेजी गई थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित इस ऐतिहासिक संकल्प के बावजूद आज तक राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं हो सकी है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि राजस्थानी केवल एक बोली नहीं, बल्कि समृद्ध साहित्यिक परंपरा, लोक संस्कृति, इतिहास एवं करोड़ों लोगों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। यह भाषा सदियों से राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान, वीरता, भक्ति, लोककथाओं, लोकगीतों तथा लोकज्ञान की संवाहक रही है। साहित्य अकादमी द्वारा भी राजस्थानी को स्वतंत्र भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की जा चुकी है तथा देश-विदेश के अनेक विश्वविद्यालयों में इस पर शोध कार्य निरंतर संचालित हो रहे हैं।
बार एसोसिएशन ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि तत्कालीन केन्द्रीय गृहमंत्री द्वारा संसद में राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने के संबंध में सकारात्मक वक्तव्य दिया गया था तथा सीताकांत महापात्र समिति ने भी अपनी अनुशंसाओं में राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में सम्मिलित करने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद आज तक इस दिशा में अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है, जिससे प्रदेशवासियों में निराशा है।
ज्ञापन में हाल ही में सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा मातृभाषा आधारित शिक्षा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में दिए गए निर्देशों का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता प्रदान करना समय की आवश्यकता है। साथ ही राज्य के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी भाषा के स्थायी विभाग स्थापित करने तथा मातृभाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित ने कहा कि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का विषय किसी एक संगठन, साहित्यकार या लेखक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक अस्मिता, गौरव एवं करोड़ों राजस्थानी भाषियों के सम्मान से जुड़ा हुआ प्रश्न है। उन्होंने केन्द्र एवं राज्य सरकार से इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया।
ज्ञापन में राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया है कि वे राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के संबंध में केन्द्रीय गृह मंत्रालय एवं संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश प्रदान कर करोड़ों राजस्थानी भाषियों की लंबे समय से लंबित मांग पर सकारात्मक निर्णय सुनिश्चित करने की कृपा करें।
इस अवसर पर बार एसोसिएशन ने विश्वास व्यक्त किया कि राजस्थानी भाषा को उसका संवैधानिक सम्मान दिलाने की दिशा में शीघ्र सार्थक पहल होगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजीव