कम निकला सामान तो विभाग का शिकंजा: प्रदेशभर में 44 फर्मों पर कार्रवाई, 7.06 लाख का जुर्माना
जयपुर, 07 अगस्त (हि.स.)। प्रदेशभर में पैक्ड खाद्य एवं उपभोक्ता वस्तुओं में कम तौल और नियमों की अनदेखी करने वाली फर्मों पर विधिक माप विज्ञान (लीगल मेट्रोलॉजी) विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री सुमित गोदारा के निर्देश पर दो दिवसीय विशेष अभियान चलाकर 62 फर्मों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 44 फर्मों के खिलाफ विभिन्न अनियमितताओं पर कार्रवाई करते हुए कुल 7 लाख 6 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
अभियान के दौरान सबसे अधिक अनियमितता बिना अनिवार्य पैकर पंजीकरण के पैकिंग कार्य करने की सामने आई। विभाग को 24 फर्में बिना पैकर रजिस्ट्रेशन के संचालन करती मिलीं, जबकि 32 फर्में सत्यापित बाट-माप का उपयोग नहीं करती थीं अथवा उनके पास वैध सत्यापन प्रमाण-पत्र नहीं था। इन सभी मामलों में विधिक कार्रवाई की गई।
इसके अलावा 9 फर्मों को पैकेज्ड कमोडिटीज नियम, 2011 के तहत पैकेटों पर अनिवार्य घोषणाएं अंकित नहीं करने पर सुधार सूचना (इम्प्रूवमेंट नोटिस) जारी किया गया।
जांच के दौरान उपभोक्ताओं से सीधे जुड़े गंभीर मामले भी सामने आए। अजमेर की आरके प्रोडक्ट्स में पैक किए जा रहे कॉर्न स्नैक्स के पैकेटों में घोषित मात्रा से कम सामग्री पाई गई। वहीं अलवर की सिबा मसाला उद्योग प्रा. लि. के 100 ग्राम धनिया पाउडर और अब्राम फूड लिमिटेड के 500 मिलीलीटर सरसों तेल के पैकेटों में भी निर्धारित मात्रा से कम उत्पाद मिला। दोनों अलवर स्थित इकाइयों से 50-50 पैकेट जब्त किए गए।
उपनियंत्रक विधिक माप विज्ञान आलोक झरवाल ने बताया कि अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बिकने वाली पैक्ड वस्तुओं में वही मात्रा उपलब्ध हो, जो पैकेट पर अंकित है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे विशेष अभियान लगातार चलाए जाएंगे और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
विभाग ने सभी पैकर्स, निर्माताओं और विक्रेताओं से अपील की है कि वे विधिक माप विज्ञान अधिनियम एवं लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 का पूर्ण पालन करें, ताकि उपभोक्ताओं के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित