एमडीएम अस्पताल : गर्दन की महाधमनी केरॉटिड आर्टरी के रास्ते हृदय के सिकुड़े हुए ऑर्टिक वाल्व की सर्जरी
जोधपुर, 13 अपै्रल (हि.स.)। मथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में एंडोवस्कुलर तकनीक- टावी (ट्रांस कैथेटर ऑर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन/ रिप्लेसमेंट) के माध्यम से राजस्थान में पहली बार कार्डियो थोरेसिक सर्जनों की टीम ने गर्दन की महाधमनी केरॉटिड आर्टरी के रास्ते महिला मरीज के हृदय के सिकुड़े हुए ऑर्टिक वाल्व से निजात दिलाई।
सीटीवीएस विभागअध्यक्ष डॉ. सुभाष बलारा ने बताया कि 63 वर्षीय शिवपुरा खिंमसर निवासी मोहनी देवी गत दो वर्षों से सीने में दर्द, सांस फूलने तथा हृदय गति की अनियमिता से पीडि़त थी। जांचों के उपरांत यह पता चला कि उनके हृदय के ऑर्टिक वाल्व में काफी सिकुडऩ (सिवियर अयोर्टिक स्टेनोसिस) है और यह खराब हो चुका है। अत: परिजनों की सहमति, मरीज की बीमारी, उम्र तथा कोमौरबिड इलनेसेस को देखते हुए मरीज को टावी प्रोसीजर करने का निर्णय लिया गया। इस प्रोसीजर में मरीज के गर्दन की महाधमनी कैरोटिड आर्टरी के रास्ते इंट्री करके टावी तकनीक से खराब अयोरटिक वाल्व को नए वाल्व से रिप्लेस किया गया। यह संभवत संपूर्ण राजस्थान में पहला टावी प्रोसीजर है जो की गर्दन की महाधमनी के रास्ते सफलतापूर्वक किया गया।
ऑपरेशन टीम में कार्डियोथोरेसिक विभाग के डॉ. सुभाष बलारा, डॉ. अभिनव सिंह, डॉ. देवाराम, डॉ. अमित, कार्डियोलॉजी विभाग से डॉ. रोहित माथुर, एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश करनावत, डॉ. भरत चौधरी, डॉ. कृति, डॉ. अलीशा, स्टाफ आसिफ, नीलम, प्रकाश, धर्मेंद्र मरेठा, प्रेम, दिनेश गोस्वामी, माधो सिंह और मनोज ने अपना सहयोग प्रदान किया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने बताया कि यह ऑपरेशन इसलिए भी विशेष है क्योंकि गर्दन की महा धमनी ही खून को दिमाग तक ले जाने का काम करती है इसलिए इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों द्वारा सेरेब्रल ऑक्सीमीटर के सर्विलांस में इस प्रोसीजर को किया गया जिससे मरीज को न्यूरोवस्कुलर कॉम्प्लिकेशन से बचाया जा सकता है तथा उसकी पहले ही रोकथाम की जा सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश