आषाढ़ मास में बनेंगे कई शुभ संयोग: देवशयनी एकादशी से चार माह योग निद्रा में जाएंगे विष्णु
जयपुर, 02 जुलाई (हि.स.)। हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के समापन के साथ ही आषाढ़ मास का शुभारंभ हो गया है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाने वाला यह पवित्र महीना 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा तक रहेगा। भगवान विष्णु, भगवान शिव और गुरु की आराधना को समर्पित इस माह में वर्षा ऋतु का भी पूर्ण आगमन होता है, जिसे प्रकृति में नवसृजन और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
आषाढ़ मास के दौरान भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, गुप्त नवरात्रि, देवशयनी एकादशी और चातुर्मास जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजन होंगे। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही चातुर्मास शुरू होगा और परंपरा के अनुसार विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।
राजधानी जयपुर में आषाढ़ मास के आरंभ के साथ ही आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर, ताड़केश्वर महादेव, गलता तीर्थ सहित प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया है। श्रद्धालु भगवान विष्णु और शिव की आराधना के लिए बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंच रहे हैं।
आषाढ़ मास में 3 जुलाई को कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी, 10 जुलाई को योगिनी एकादशी, 12 जुलाई को प्रदोष व्रत एवं मासिक शिवरात्रि, 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या, 15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि, 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ रथयात्रा, 21 जुलाई को मासिक दुर्गाष्टमी, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी एवं चातुर्मास प्रारंभ तथा 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा एवं आषाढ़ पूर्णिमा मनाई जाएगी।
पंडित बनवारी लाल शर्मा के अनुसार आषाढ़ मास में ब्रह्म योग सहित कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है। यह समय धार्मिक अनुष्ठान, जप, तप, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। राहु के धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश से अंगारक योग का प्रभाव भी बना है, जिसे कई राशियों के लिए परिवर्तनकारी माना जा रहा है। वहीं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग वर्षा और कृषि के लिए शुभ संकेत माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास में पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है। आयुर्वेद और धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस माह में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखते हुए बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियों तथा तामसिक भोजन से परहेज करना लाभकारी माना गया है। साथ ही जल संरक्षण को भी विशेष महत्व देते हुए जल की बर्बादी नहीं करने का संदेश दिया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश