अभ्यास व साधना से ही प्राप्त होगी दक्षता: कुलगुरु
जोधपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद के स्नातकोत्तर क्रिया शारीर विभाग द्वारा एक माह का सेमी-ऑनलाइन नाड़ी परीक्षण प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का उद्घाटन समारोह गुरुवार को सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के अभिनंदन हुआ। पाठ्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर दिनेश चंद्र शर्मा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। इसके पश्चात प्रतिभागियों द्वारा आत्म परिचय दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने कहा कि नाड़ी के पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक संसाधनों द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है
उन्होंने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत भारतीय संस्कृति में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में आयुर्वेद द्वारा रोगी परीक्षा एवं रोग निदान के अंतर्गत नाड़ी परीक्षण विषयक पाठ्यक्रम का मनुष्य के स्वास्थ्य संरक्षण एवं चिकित्सा में महत्वपूर्ण योगदान रहेगा, नाडी परीक्षा के नित्य अभ्यास एवं साधना से ही प्रशिक्षणार्थी दक्षता प्राप्त कर सकेंगे। पीजीआईए के प्राचार्य एवं निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) चंदन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर डीन फैकल्टी आयुर्वेद प्रो. (डॉ.) महेंद्र कुमार शर्मा, चिकित्सालय अधीक्षक प्रो. (डॉ.) गोविंद प्रसाद गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजाराम अग्रवाल, बालरोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) हरीश कुमार सिंघल, पंचकर्म विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश शर्मा, डॉ. पूजा पारीक, डॉ. प्रियंका कुमारी एवं क्रिया शारीर विभाग के समस्त पीजी छात्र तथा प्रतिभागी ऑनलाइन उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश