अतिक्रमण से सिकुड़ता कानोता बांध

 


जयपुर, 26 फ़रवरी (हि.स.)। जलसंसाधन विभाग, पुलिस और माफियाओं की कथित मिलीभगत के चलते कानोता बांध के जलभराव क्षेत्र पर लगातार कब्जे हो रहे है और बांध का डूब क्षेत्र घटता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलसंसाधन विभाग के अधिकारी शिकायत पर आते है लेकिन खानापूर्ति करके लौट जाते है। पुलिस का हाल भी कुछ ऐसा ही है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले वर्षो में बांध का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मित्तल कॉलेज के पीछे पुराना मुकुंदपुरा में कानोता बांध का जलभराव क्षेत्र है। यहां पर एक होटल कारोबारी ने भूमाफियाओं से जमीन खरीदी है और वह जलभराव वाले क्षेत्र में मिट्टी भरवाने के साथ बाउंड्रीवाल बनवा रहा है। भूमाफिया दबी जुबान से यह भी स्वीकार कर रहे है कि अगर पैसा खर्च किया जाए तो अधिकारी भी कार्रवाई नहीं करते है और उनका काम धडल्ले से हो जाता है। अधिकारी और जमीन के हिसाब से पैसा खर्च करना पड़ता है।

मुकुंदपुरा गांव में कानोता बांध के भराव क्षेत्र में दिन-रात जेसीबी, ट्रेक्टर-ट्रॉली और डम्पर से मिट्टी डालने का काम चल रहा है। इसके अलावा दिशा फार्म हाउस के पास और एक सरकारी स्कूल के पास भी बांध के भराव क्षेत्र को पाटने का काम चल रहा है।

इस सबंध में जलसंसाधन विभाग की एईएन अनुराधा चौधरी ने बताया कि मामले की शिकायत आने के बाद जेईएन को मौके पर भेजा है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जो शिकायत आई थी उसका काम रुकवा दिया गया था। अब वहां पर फिर से काम चल रहा है तो उसे दिखवा लेती हूं।

उल्लेखनीय है कि कानोता बांध जो ढूंढ़ नदी पर बना हुआ है, सूखे इलाकों में पानी की कमी दूर करने के लिए 2001 में बनकर तैयार हुआ था (1984 में शुरू हुआ)। यह बांध जयपुर के लिए सिंचाई और पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है। कानोता बांध अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, खासकर मानसून में जब यह ओवरफ्लो होता है और आसपास के कई गांवों को फायदा होता है। 22 साल बाद पहली बार साल 2023 में कानोता बांध छलका। इसके बाद से लगातार कानोता बांध ओवरफ्लो हो रहा है। कानोता बांध की भराव क्षमता करीब 17 फीट है। कानोता बांध में मछली पालन भी किया जाता है। सरकारी जमीन और नदी-नालों पर भूमाफियाओं की निगाहे शहर में लगातार नदी-नालों और बांधों की जमीन पर अतिक्रमण के मामले सामने आ रहे है, लेकिन प्रशासन इनकी सुरक्षा को लेकर संजीदा नहीं है। इससे लगातार इनकी जमीनों पर कॉलोनियां काटने के साथ कब्जा कर रिसोर्ट सहित अन्य निर्माण कार्य किए जा रहे है। कानोता बांध के अलावा चंदलाई बांध, ढूंढ नदी, करतारपुरा नाला सहित अन्य स्थानों पर लगातार अतिक्रमण के मामले सामने आ रहे है। हाल ही तहसीलदार की मिलीभगत से एक जलस्त्रोत की जमीन पर कॉलोनी काट दी गई थी। कानोता बांध के भराव क्षेत्र की जमीन को महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। कानोता बांध और उसके आस-पास जमीन का बाजार भाव करीब डेढ़ करोड़ रुपए बीघा का है, लेकिन माफिया कानोता बांध के भराव क्षेत्र की जमीन को 40 से 50 लाख रुपये बीघा में बेच रहे है। बताया जा रहा है कि इन जमीन को खरीदकर भूमाफिया सोसायटी के नाम से बांध पट्टा काटकर सौदा कर रहे हैं। खास बात यह है कि अवैध कब्जा करने के लिए मिट्टी भी सरकारी जमीन से ही उठाई जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश