अग्निवीर समुद्र सिंह की अस्थियां पहुंचीं अलवर, नम आंखों से गांव ने दी अंतिम विदाई
अलवर, 05 नवंबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के दौरान लापता हुए अलवर के अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर का पार्थिव शरीर करीब 80 दिन बाद बरामद होने के बाद गुरुवार को उनकी अस्थियां पैतृक गांव केसरपुर पहुंचीं। अस्थि कलश पहुंचते ही गांव में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। ग्रामीणों और सर्व समाज के लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इस दौरान पूरा गांव समुद्र सिंह अमर रहें के नारों से गूंज उठा।
अलवर शहर के निकट केसरपुर गांव निवासी 20 वर्षीय समुद्र सिंह गुर्जर अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली क्षेत्र में तैनात थे। 14 अगस्त 2026 को क्षेत्र में बादल फटने और अचानक आई भीषण बाढ़ की चपेट में सेना के कई जवान आ गए थे। इस हादसे में समुद्र सिंह सहित पांच जवान लापता हो गए थे।
80 दिन तक चला तलाश अभियान
हादसे के बाद भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में संयुक्त तलाश अभियान चलाया। खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जवानों की खोज जारी रही। करीब 80 दिन बाद समुद्र सिंह का पार्थिव शरीर बरामद हुआ। डीएनए जांच के जरिए उनकी पहचान की पुष्टि की गई।
3 नवंबर को असम के डिब्रूगढ़ में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद उनकी अस्थियां परिजनों को सौंप दी गईं। गुरुवार को सेना के जवान अस्थि कलश लेकर उनके पैतृक गांव केसरपुर पहुंचे। इससे पहले गांव के बस स्टैंड से श्रद्धांजलि यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। गांव में सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई और अस्थि विसर्जन किया गया।
समुद्र सिंह ने लापता होने से पहले फोन पर अपने पिता से बात की थी। उन्होंने रक्षाबंधन पर छुट्टी लेकर घर आने और पिता का इलाज कराने का भरोसा दिलाया था। परिवार बेटे के लौटने की उम्मीद लगाए बैठा था, लेकिन करीब 80 दिन बाद उसकी मृत्यु की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
समुद्र सिंह का परिवार लंबे समय से सेना से जुड़ा रहा है। उनके दादा पलटूराम सेना में हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हीं से प्रेरित होकर समुद्र सिंह ने भी सेना में भर्ती होकर देशसेवा का सपना देखा था। वर्ष 2024 में अग्निवीर योजना के तहत उनका चयन हुआ था। महज 20 वर्ष की उम्र में देश की सेवा करते हुए उनका इस तरह असमय चले जाना पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार