अंतरराष्ट्रीय सहयोग पौध पोषण अनुसंधान को आगे बढ़ाने में सार्थक—प्रो पेट्रा बाउअर

 


अजमेर, 27 फरवरी(हि.स.)। हाइनरिख हाइने विश्वविद्यालय ड्यूसलडॉर्फ की सह-संयोजक प्रो. पेट्रा बाउअर, ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग पौध पोषण अनुसंधान को आगे बढ़ाने तथा वैश्विक रूप से प्रासंगिक फसल सुधार रणनीतियों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रो पेट्रा बाउअर राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के जैव रसायन विभाग द्वारा स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ़ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलेब्रेशन पहल के अंतर्गत “तनाव सहनशीलता और पोषणीय खाद्य सुरक्षा के लिए प्लांट बायोटेक्नोलॉजी में प्रगति – दलहनी एवं उपेक्षित फसलों के लिए संभावनाएं” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रही थी।

राजस्थान विश्वविद्यालय के आइएचबीटी के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि सम्मेलन ने जैव संसाधनों और पादप जैव प्रौद्योगिकी को सतत कृषि एवं जैव-अर्थव्यवस्था से प्रभावी रूप से जोड़ा। इसी कड़ी में एनआईएम की निदेशक डॉ. हेमा यादव ने कहा कि एसपीएआरसी 2026 ने कृषि-जैवप्रौद्योगिकी नवाचार और उद्यमिता की भूमिका को उजागर किया।

स्टेलनबॉश विश्वविद्यालय की डॉ. क्रिस्टेल वैन डेर वाईवर ने कहा कि सम्मेलन ने पौधों की अकार्बनिक तनाव सहनशीलता बढ़ाने पर आधुनिक जैवप्रौद्योगिकीय दृष्टिकोणों पर सार्थक चर्चा का मंच प्रदान किया। वहीं सम्मेलन में प्रो. संजीब कुमार पांडा ने पादप जैव प्रौद्योगिकी को तनाव सहनशीलता एवं पोषण सुरक्षा से जोड़ते हुए दलहनी एवं अनाथ फसलों की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

इस सम्मेलन में प्लांट स्ट्रेस फिजियोलॉजी, जीनोम एडिटिंग, जीनोमिक्स एवं ट्रांसक्रिप्टोमिक्स, सूक्ष्मजीव अंतःक्रियाएं, बायोफोर्टिफिकेशन, एआई-आधारित लक्षण पहचान तथा कृषि जैव प्रौद्योगिकी में नवाचार जैसे उभरते विषयों पर 5 व्याख्यान आयोजित किए गए थे जिसमें 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया था। जिसमें सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका के स्टेलनबोश विश्वविद्यालय, जर्मनी के कोलोन विश्वविद्यालय सहित भारत के प्रमुख संस्थानों तथा विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों के विशिष्ट वक्ताओं ने अत्याधुनिक शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। साथ ही इन प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने जलवायु-सहिष्णु कृषि और पोषणीय सुरक्षा के लिए सतत एवं नवाचार आधारित समाधानों पर विचार-विमर्श किया। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी ऑफ द नेगेव (इज़राइल), बिट्स पिलानी (पिलानी एवं गोवा परिसर), बनस्थली विद्यापीठ, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी, जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब तथा सीयूआर के विभिन्न स्कूलों एवं विभागों के छात्रों एवं शोधकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष