अंतरराष्ट्रीय भू-विविधता दिवस 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा

 


मेहरानगढ़ में होगा ‘जियोहेरिटेज अवेयरनेस प्रोग्राम एवं हेरिटेज वॉक

जोधपुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय भू- विविधता दिवस के अवसर पर 6 अक्टूबर को मेहरानगढ़ दुर्ग में ‘जियोहेरिटेज अवेयरनेस प्रोग्राम एवं हेरिटेज वॉक’ का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय भू- विविधता दिवस की थीम हमारे दरवाजे पर भू विविधता है, जिसका उद्देश्य हमारे आसपास मौजूद भू-विविधता तथा दैनिक जीवन में उसके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

आयोजन समिति के डॉ शिव सिंह राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य मेहरानगढ़ और जोधपुर की समृद्ध भू- विरासत एवं भू- विविधता को आमजन, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों, पर्यटक गाइड, स्थानीय समुदायों एवं आगंतुकों तक पहुंचाना है।

विश्व के अनेक देशों में भू-विरासत के संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, शिक्षा, सतत विकास और जियो- टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की अवधारणा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्तमान में 51 देशों में 241 यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क हैं, जबकि भारत में अभी तक एक भी यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क नहीं है।

ऐसे में जोधपुर की समृद्ध भू-विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में मेहरानगढ़ जियोपार्क की परिकल्पना महत्वपूर्ण हो जाती है। यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क के लिए निर्धारित विभिन्न मानकों और चेकलिस्ट के संदर्भ में मेहरानगढ़ क्षेत्र की भूगर्भीय, भू-आकृतिक, जल- विरासत एवं सांस्कृतिक विशेषताओं का अध्ययन इसे जियोपार्क की दिशा में संभावनाशील बनाता है।

अंतरराष्ट्रीय भू- विविधता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से आमजन में मेहरानगढ़ की भू- विरासत एवं भू- विविधता के प्रति जागरूकता पैदा करने का विशेष प्रयास किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि मेहरानगढ़ की विशिष्ट भू-विरासत को संरक्षण, शोध, शिक्षा और सतत पर्यटन से जोड़ते हुए भविष्य में इसे भारत के पहले यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास आगे बढ़ाया जा सके।

डॉ राठौड़ ने बताया कि यदि यह पहल सफल होती है तो यह न केवल मेहरानगढ़ और जोधपुर, बल्कि पूरे राजस्थान और भारत के लिए गौरव का विषय होगा। भारत के पहले यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क का गौरव जोधपुर को प्राप्त हो, इस उद्देश्य को जन-जागरूकता और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

मेहरानगढ़ केवल एक ऐतिहासिक दुर्ग ही नहीं, बल्कि जोधपुर की विशिष्ट भूगर्भीय संरचना, चट्टानों, जल प्रणालियों, भू-आकृतिक विशेषताओं और मानव सभ्यता के बीच संबंधों को समझने का महत्वपूर्ण स्थल भी है। क्षेत्र की भूगर्भीय परिस्थितियों ने यहां की वास्तुकला, पारंपरिक जल प्रबंधन, बसावट, संस्कृति और जीवनशैली को प्रभावित किया है।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रात: 6:30 बजे से हेरिटेज वॉक आयोजित की जाएगी। वॉक के दौरान मेहरानगढ़ दुर्ग एवं उसके आसपास के छह महत्वपूर्ण स्थलों के माध्यम से प्रतिभागियों को क्षेत्र की भू-विरासत और उससे जुड़े प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।

कार्यक्रम में भू-विज्ञान एवं विरासत विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को जोधपुर की चट्टानी संरचना, भू-आकृतिक विशेषताओं, पारंपरिक जल स्रोतों तथा मेहरानगढ़ की स्थापत्य विरासत के बीच संबंधों से अवगत कराया जाएगा।

किसी क्षेत्र की विरासत केवल उसके स्मारकों और स्थापत्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे मौजूद भूगर्भीय और प्राकृतिक विरासत भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। भू-विरासत के संरक्षण के साथ-साथ इसके वैज्ञानिक, शैक्षणिक एवं पर्यटन संबंधी महत्व को सामने लाना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के माध्यम से जोधपुर की विशिष्ट भू-विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने तथा जियो- टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में जन-जागरूकता का प्रयास किया जाएगा।

कार्यक्रम में जियो हेरिटेज पर चर्चा के लिए विशेषज्ञ भू विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुरेश माथुर, डॉ शिव सिंह राठौड़, मेहरानगढ़ म्यूजियम के डॉ महेंद्र सिंह तंवर, कर्नल अजय सिंह शेखावत व जयपुर से डॉ सौरभ माथुर एवम् लगभग 250 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों के साथ संवाद एवं विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश