अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल को जयपुर से भावभीनी विदाई, राजस्थान के आतिथ्य से अभिभूत रहे अतिथि

 


जयपुर, 18 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन के बाद भ्रमण कार्यक्रम के लिए राजस्थान आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल को रविवार को जयपुर हवाई अड्डे से भावभीनी विदाई दी गई। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभी अतिथियों को गुलाब का फूल भेंट कर पारंपरिक और गरिमामय तरीके से विदा किया।

विदाई के अवसर पर सभी विदेशी अतिथियों ने राजस्थान में मिले आत्मीय आतिथ्य को अभूतपूर्व बताया।

राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर और पीठासीन अधिकारी राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहर, पर्यटन स्थलों, समृद्ध संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजनों की अविस्मरणीय स्मृतियां संजोते हुए जयपुर से रवाना हुए।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने स्वागत के दौरान भेंट किए गए पारंपरिक दुपट्टों को विदाई तक गले में पहने रखा। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष देवनानी के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थान में मिला स्नेह, सम्मान और अपनापन सदैव याद रहेगा। देवनानी के सम्मान में आयोजित रात्रि भोज में परोसे गए राजस्थानी व्यंजनों और पारंपरिक आवभगत की प्रतिनिधियों ने जमकर सराहना की।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुत लोकनृत्य और लोक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों ने विदेशी मेहमानों को विशेष रूप से आकर्षित किया। प्रतिनिधियों ने राजस्थान की लोक कला और संस्कृति को जीवंत और अनूठा बताया।

भ्रमण के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने अल्बर्ट हॉल संग्रहालय की दुर्लभ कला कृतियों को देखा, जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। हवामहल की बेजोड़ स्थापत्य कला और संध्या काल में उसका मनमोहक दृश्य अतिथियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं, विश्वविख्यात आमेर महल की ऐतिहासिक और भव्य छटा ने प्रतिनिधियों को अभिभूत कर दिया।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह राजस्थान के लिए गर्व का विषय है कि विश्व के विभिन्न देशों से आए संसदीय प्रतिनिधि हमारी समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा से रूबरू होकर गए। उन्होंने बताया कि इस दौरान प्रतिनिधियों को राज्य की सांस्कृतिक धरोहर, लोकतांत्रिक परंपराओं, संसदीय मूल्यों और विकास यात्रा से परिचित कराने का अवसर मिला।

देवनानी ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से राजस्थान की वैश्विक पहचान और अधिक सशक्त होगी तथा पर्यटन, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार और प्रशासन द्वारा प्रतिनिधियों के स्वागत और प्रवास के लिए की गई सुव्यवस्थित तैयारियों के कारण यह भ्रमण यात्रा अतिथियों के लिए पूरी तरह यादगार बन सकी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित