भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: कॉलेज प्राचार्य बर्खास्त, 10 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने का फैसला

 


जयपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने अभियोजन स्वीकृति, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच और विभागीय कार्रवाई से जुड़े करीब 40 मामलों में निर्णय किए हैं। कार्रवाई के तहत लैंगिक उत्पीड़न के मामले में एक राजकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्राचार्य को सेवा से बर्खास्त करने के साथ ही एक प्रवक्ता और पुस्तकालयाध्यक्ष को भी सेवा से हटाने की मंजूरी दी गई है।

महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्राओं के लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री ने गंभीरता दिखाते हुए प्राचार्य की बर्खास्तगी का निर्णय लिया। मामले में सहयोग करने वाले प्रवक्ता और पुस्तकालयाध्यक्ष को भी सेवा से हटाने की स्वीकृति दी गई है। सरकार के इस फैसले को कार्यस्थल पर गंभीर कदाचार के खिलाफ कड़ा कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक मामलों में पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध लाभ लेने से जुड़े छह गंभीर प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है।

इन मामलों में सवाई मानसिंह चिकित्सालय के वरिष्ठ आचार्य, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता, वित्तीय सलाहकार, सहायक अभियंता और विकास अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है। कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सेवा काल में अनुशासनहीनता, दुराचरण और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन पर भी कार्रवाई का निर्णय लिया है। ऐसे 10 अधिकारियों की पेंशन रोकने की स्वीकृति दी गई है। इनमें पांच मामलों में शत-प्रतिशत पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया। एक मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत न्यायालय से दोषसिद्धि के बाद पूरी पेंशन रोकने की मंजूरी दी गई है, जबकि अन्य मामलों में विभागीय जांच पूरी होने तक शत-प्रतिशत पेंशन रोकने का फैसला किया गया है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत पांच मामलों में विस्तृत जांच का अनुमोदन करते हुए एसीबी को आगे अन्वेषण की अनुमति दी गई है। इसके अलावा राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत छह मामलों में संबंधित अधिकारियों की वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय किया गया।

सीसीए नियम 17 के तहत विचाराधीन दो मामलों में आरोपित अधिकारियों को परिनिंदा का दंड दिया गया। वहीं नियम 23 के तहत दो पुनरीक्षण याचिकाओं पर राहत देते हुए वेतन वृद्धि रोकने के दंड को परिनिंदा में परिवर्तित करने की स्वीकृति दी गई।

सीसीए नियम 34 के तहत प्रस्तुत चार पुनरीक्षण याचिकाओं को खारिज कर पूर्व दंडादेश यथावत रखे गए हैं और संबंधित अनुशंसाएं राज्यपाल को भेजी गई हैं।

इसके साथ ही विभागीय जांच से जुड़े चार प्रकरणों को समाप्त करते हुए आरोपित अधिकारियों को दोषमुक्त करने का निर्णय भी लिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित