रोजगार लेने वाला नहीं—रोजगार देने वाला बन रहा देश का युवा : राज्यवर्धन सिंह राठौड़

 






जयपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। देश का युवा अब रोजगार लेने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बन रहा है। बीते एक दशक में युवाओं की सोच और भूमिका में बड़ा बदलाव आया है। खेल, तकनीक और रक्षा सहित हर क्षेत्र में युवा देश निर्माण में योगदान दे रहे हैं। साथ ही नई पीढ़ी का झुकाव सनातन की ओर भी बढ़ा है। यह बात युवा मामले एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने शुक्रवार को जेएलएन मार्ग स्थित होटल क्लार्क आमेर में तीन दिवसीय ‘द जयपुर डायलॉग’ के 11वें सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कही।

‘भारत को क्यों आगे बढ़ना चाहिए’ विषय पर आयोजित संवाद में राठौड़ ने सम्मेलन के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह संजय दीक्षित के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, विपक्ष की भूमिका, युवा पीढ़ी और खेलों में युवाओं के योगदान पर विचार रखे। विपक्षी दलों पर आंदोलनों के माध्यम से राजनीति चमकाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने चुनाव आयोग और एसआईआर पर भी अपनी बात रखी। राठौड़ ने कहा कि 1952 से अब तक देश में 12 बार एसआईआर हुआ, जिनमें 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में हुआ। यह चुनाव आयोग का काम है, सरकार का नहीं। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता में नहीं है, वहां इस मुद्दे पर अधिक विरोध किया जा रहा है।

उद्घाटन अवसर पर ओमेंद्र रत्नू और जय आहूजा की पुस्तक ‘पाकिस्तान के हिंदू व सिख : एक अनवरत नरसंहार’ का विमोचन किया गया। अन्य सत्रों में अमि गणात्रा की पुस्तक ‘द वॉइस एंड द लेक ऑफ रिडल्स’ और शांतनु गुप्ता की पुस्तक ‘बुलडोजर बाबा’ का भी विमोचन हुआ।

पहले सत्र ‘नैरेटिव वॉर : भारत के उभार की कहानी कौन तय करता है?’ में वरिष्ठ लेखक गणेश भाऊ तोरसेकर, ब्रिगेडियर पांडे, आरजे रौनक, ओंकार चौधरी और करण वर्मा ने विचार रखे। संचालन अभिजीत अय्यर मित्रा ने किया। वक्ताओं ने कहा कि नैरेटिव के मोर्चे पर भारत ऑनलाइन चुनौतियों का सामना कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर अपनी बात रखने में सफल रहा है। ओंकार चौधरी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विदेशी दबाव में भारत की हार का नैरेटिव बनाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी उपलब्धियों और सॉफ्ट पावर को प्रभावी ढंग से सामने नहीं रख पाया।

‘खतरनाक दुनिया में भारत : क्या विदेशी ताकतें अस्थिरता पैदा कर रही हैं?’ विषय पर दूसरे सत्र में लेखक सुशांत सरीन, सुमित पीर, तिलक देवाशेर और मेजर समीर पाल तूर ने चर्चा की। वक्ताओं ने नई पीढ़ी को भारतीय सभ्यता और संस्कृति से परिचित कराने तथा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने आरक्षण के आर्थिक आधार पर विचार करने, क्रांतिकारी सुधारों और मजबूत पारिवारिक मूल्यों को राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी बताया। संचालन आदि अचिंत ने किया।

तीसरे सत्र ‘बॉलीवुड ने भारत को कैसे गुमराह किया?’ में लेखिका अमि गणात्रा, पत्रकार हर्ष कुमार, अभिषेक तिवारी, साहित्यकार अनुपम मिश्र और सूजैन बर्नेट ने विचार रखे। वक्ताओं ने बॉलीवुड की फिल्मों और उनकी विषयवस्तु पर सवाल उठाए। कुछ वक्ताओं ने इसे सनातन विरोधी बताया, जबकि चर्चा में रचनात्मक स्वतंत्रता के पक्ष को लेकर भी अलग-अलग विचार सामने आए।

चौथे सत्र में देश के आंतरिक विरोधियों, वैचारिक नक्सलवाद और चरमपंथ जैसे मुद्दों पर राजनीतिक विश्लेषक जे. आहूजा, पंकज सक्सेना, निसार अहमद शेख, अंकुर आर्य और शांतनु गुप्ता ने विचार रखे। संचालन धीरेंद्र पुंडीर ने किया।

‘उम्माह का चुम्मा : मक्का पैक्ट’ सत्र में मेजर जनरल राजीव नारायणन, सुमित पीर, सुशांत सरीन और आदि अचिंत ने पश्चिम एशिया की परिस्थितियों और बदलते युद्ध के तरीकों पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि अब आमने-सामने की लड़ाई के बजाय मिसाइल और ड्रोन से युद्ध लड़े जा रहे हैं। ईरान, इराक, सऊदी अरब और पाकिस्तान की नीतियों तथा आर्थिक चुनौतियों पर भी विचार रखे गए।

‘सिस्टम तो हमारा है : सीजेपी’ सत्र में हर्ष कुमार, अंकुर आर्य, शांतनु गुप्ता और अभिषेक तिवारी ने भारत के खिलाफ कथित वैचारिक इकोसिस्टम और सनातन समाज की भूमिका पर चर्चा की। वक्ताओं ने वेदों और उपनिषदों की सरल टीकाएं तैयार कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा धर्म जागरण के लिए जमीनी स्तर पर काम करने का आह्वान किया।

‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा’ सत्र में संजीव नेवार, साहिल और नीरज अत्री ने सामाजिक तनाव, अफवाहों, कानून-व्यवस्था और हेट स्पीच के मुद्दों पर विचार रखे। वहीं ‘एससी-एसटी एक्ट कंट्रोवर्सी’ सत्र में धीरेंद्र पुंडीर, अवनीश पीएन शर्मा, पंकज सक्सेना और एकलव्य सिंह ने सामाजिक समरसता, धर्म-संस्कृति और आगामी पीढ़ी तक सांस्कृतिक मूल्यों के हस्तांतरण पर चर्चा की।

सम्मेलन में ‘सिविल वार होने वाला है?’, ‘ब्रिक्स बनाम जी-7, ट्रंप बनाम मोदी’, ‘भारत की कश्मीर नीति और अफ-पाक’, ‘भारत में मनुस्मृति विवाद’, ‘सीजेपी को विदेशी एजेंटों से वित्त पोषण और सरकार की भूमिका’, ‘जेन-जी शादी क्यों नहीं करना चाहता’ तथा ‘हमारी सभ्यता और नई पीढ़ी’ जैसे विषयों पर भी सत्र आयोजित हुए। मंच संचालन प्रणय भारद्वाज ने किया।

आयोजन के सेलिब्रेशन पार्टनर प्रीनॉर्ड रिकॉर्ड, वेन्यू पार्टनर क्लार्क आमेर तथा सह-प्रायोजक धर्मांश फाउंडेशन, ब्लू वन इंक और मनीष कलारिया हैं। डाटा इंफोसिस, सुरुचि प्रकाशन और गरुड़ आयोजन के सहयोगी हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश