युवा आपदा मित्र बनें एनसीसी कैडेट: 57 युवाओं को मिला आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण

 




जयपुर, 18 जून (हि.स.)। आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में अब राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), जिला प्रशासन और पुलिस के साथ एनसीसी कैडेट भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। राजस्थान पुलिस की ओर से ‘युवा आपदा मित्र योजना’ के तहत जेएलएन मार्ग स्थित एनसीसी परिसर में सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें 57 एनसीसी कैडेट्स को आपदा बचाव एवं राहत कार्यों में सहयोग से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर गुरुवार को राजस्थान पुलिस मुख्यालय में समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रशिक्षित कैडेट्स को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। एसडीआरएफ के विशेषज्ञों ने कैडेट्स को विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक एवं मानवजनित आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्यों का व्यावहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया।

समारोह के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) संजय अग्रवाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन में जनसहभागिता बढ़ाने की दिशा में युवा आपदा मित्र योजना एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि एनसीसी कैडेट्स को फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों के साथ समन्वय स्थापित कर राहत कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षित युवा समाज सेवा और आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (आर्म्ड बटालियन एवं एसडीआरएफ) रूपिंदर सिंघ ने बताया कि युवा आपदा मित्र योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से युवाओं को आपदा प्रबंधन एवं बचाव कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भविष्य में भी विभिन्न स्थानों पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रशिक्षित युवाओं की भागीदारी राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बना सके।

कार्यक्रम में एनसीसी के कर्नल रघुवेंद्र कुमार, कर्नल विनोद कुमार (सेना मेडल), लेफ्टिनेंट कर्नल परमिंदर कौर तथा एसडीआरएफ कमांडेंट राजेन्द्र सिंह सिसोदिया ने भी कैडेट्स का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान कैडेट्स ने अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए समाज सेवा और आपदा प्रबंधन के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की।

प्रशिक्षण के दौरान कैडेट्स को भूकंप, बाढ़, आग, आंधी-तूफान, भवन ढहने जैसी आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित तरीके से लोगों को खोजने और निकालने, प्राथमिक उपचार, रक्तस्राव रोकने, जलने और फ्रैक्चर की स्थिति में सहायता प्रदान करने का प्रशिक्षण दिया गया।

इसके अलावा सीपीआर और अन्य जीवन रक्षक तकनीकों के माध्यम से बेहोशी एवं हृदय गति रुकने की स्थिति में त्वरित सहायता के तरीके सिखाए गए। बाढ़ और जलभराव में बचाव, आग लगने पर अग्निशामक यंत्रों का उपयोग, ऊंचाई एवं दुर्गम स्थानों से रस्सी आधारित रेस्क्यू तकनीक, भीड़ प्रबंधन, संचार एवं समन्वय के साथ मॉक ड्रिल का भी अभ्यास कराया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश