योग आत्मपहचान, अनुशासन और सकारात्मक जीवन दृष्टि का आधार : भागीरथ चौधरी
अजमेर, 11 जून(हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य का मूल उद्देश्य निरोग, प्रसन्न एवं संतुलित जीवन प्राप्त करना है और योग इसके लिए सर्वोत्तम माध्यम है। उन्होंने स्वाध्याय, ध्यान और आत्मपहचान को जीवन की सफलता का आधार बताते हुए कहा कि जब व्यक्ति स्वयं को पहचान लेता है, तब वह समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को भी सही रूप में समझ पाता है।
भागीरथ चौधरी गुरुवार को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के योगिक विज्ञान एवं मानव चेतना विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में ‘काउंटडाउन प्रोग्राम’ के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय संगोष्टी को संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय के स्वराज सभागार में योग से आत्म विकास और भावनात्मक संतुलन विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद दामोदर अग्रवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने की। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, हैदराबाद के जीवनव्रती एवं अखिल भारतीय योग प्रमुख रवि शर्मा रहे।
मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने भारतीय संस्कृति को विश्व की श्रेष्ठतम संस्कृति बताते हुए युवाओं से भारतीय जीवन मूल्यों, अनुशासन, दया, सकारात्मक संगति एवं कर्मप्रधान जीवन को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
रवि शर्मा ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि भावनात्मक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास का समग्र माध्यम है। उन्होंने महर्षि पतंजलि के यम और नियम को स्वस्थ समाज एवं स्वस्थ व्यक्ति निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि भावनात्मक परिपक्वता समय के साथ नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, आत्मअनुशासन और स्वाध्याय से प्राप्त होती है। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य निर्धारित कर पूर्ण समर्पण, तप, स्वाध्याय एवं कर्मयोग के माध्यम से जीवन में संतुलन स्थापित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन आत्मविकास और आत्मबोध का श्रेष्ठ अवसर है तथा योग व्यक्ति को अपने जीवन के उद्देश्य की पहचान कराता है।
विशिष्ट अतिथि सांसद दामोदर अग्रवाल ने भारतीय संस्कृति, योग एवं सनातन जीवन पद्धति की वैश्विक स्वीकार्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज विश्व भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर आशा और सम्मान की दृष्टि से देख रहा है। उन्होंने कहा कि योग केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण की सशक्त प्रक्रिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से उच्च लक्ष्य निर्धारित कर कठोर परिश्रम, सकारात्मक चिंतन एवं राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना पुनः जागृत हो रही है और युवा वर्ग आत्मविश्वास के साथ भारतीय मूल्यों को स्वीकार कर रहा है।
कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है और नई शिक्षा नीति 2020 भी समग्र एवं मूल्यपरक शिक्षा की इसी अवधारणा को आगे बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल बौद्धिक विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि शरीर, मन, आत्मा और चरित्र के संतुलित विकास की दिशा में कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने योग को चरित्र निर्माण, अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण का प्रभावी आधार बताते हुए विश्वविद्यालय में प्रार्थना, यज्ञ, गायत्री मंत्र एवं भारतीय परंपराओं पर आधारित शैक्षणिक वातावरण की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास हेतु निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन डॉ. लारा शर्मा द्वारा किया गया, जबकि आभार ज्ञापन डॉ. आशीष पारीक ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. शिव प्रसाद, प्रो. अरविंद पारीक, प्रो. सुभाष चंद्र, प्रो. सुब्रतो दत्ता, प्रो. रितु माथुर, प्रो. भारती जैन, डॉ. जयंती देवी, डॉ. अश्वनी तिवारी, प्रो. प्रवीण माथुर, डॉ. सुनील टेलर, डॉ. राजू शर्मा, वित्त नियंत्रक नेहा शर्मा, सुगन चंद मेघवंशी, दीपचंद पवार, बृजेश कुमार पांडे, शीतल विजयवर्गीय सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी का समापन योग, आत्मानुशासन एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के माध्यम से स्वस्थ, जागरूक और सशक्त समाज निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष