विश्व आदिवासी दिवस पर डूंगरपुर में उमड़ा जनसैलाब, भील प्रदेश के निर्माण का लिया संकल्प

 






डूंगरपुर, 09 अगस्त (हि.स.)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शुक्रवार को डूंगरपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच आयोजित समारोह में आदिवासी संस्कृति एवं विरासत के संरक्षण, शिक्षा के प्रसार और नशामुक्ति के साथ अलग ‘भील प्रदेश’ के निर्माण का संकल्प दोहराया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 1994 में विश्व आदिवासी दिवस घोषित किए जाने के बाद आदिवासी समाज में अपनी पहचान और अधिकारों को लेकर स्वाभिमान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के इतिहास और अधिकारों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सांसद रोत ने आरोप लगाया कि वर्ष 1982 में भारत सरकार के एक प्रतिनिधि ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा था कि देश में कोई आदिवासी नहीं रहता। उन्होंने कहा कि आज तक भारत ने आईएलओ कन्वेंशन-169 पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कन्वेंशन में अनुसूचित क्षेत्रों में खनन अथवा विकास कार्य शुरू करने से पहले आदिवासियों की सहमति को महत्वपूर्ण माना गया है।

उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान से आदिवासी समाज को संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुए। सांसद ने मानगढ़ धाम के इतिहास को राज्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रम से हटाए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कागज और कलम के माध्यम से आदिवासियों के इतिहास को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय सदस्य कांतिभाई आदिवासी ने पांचवीं अनुसूची के अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष को याद करते हुए अलग भील प्रदेश के निर्माण की मांग दोहराई। समाजसेवी भंवरलाल परमार ने भीमबेटका के प्राचीन शैलाश्रयों का उल्लेख करते हुए उन्हें आदिवासी समाज की ऐतिहासिक धरोहर बताया। उन्होंने संत मावजी महाराज के विचारों का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में अंग्रेजी शराब की दुकानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा बेणेश्वर क्षेत्र में आदिवासियों की 80 प्रतिशत भूमि सुनिश्चित करने की मांग रखी।

आसपुर विधायक उमेश डामोर और चौरासी विधायक अनिल कटारा ने आदिवासी समाज के उत्थान के लिए शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बताया। विधायक उमेश डामोर ने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि एक रोटी कम खानी पड़े तो भी बच्चों को जरूर पढ़ाएं। उन्होंने सरकारी शराब की दुकानों के बहिष्कार का भी आह्वान किया।

चौरासी विधायक अनिल कटारा ने कहा कि अपनी जड़ों, संस्कृति और इतिहास को सुरक्षित रखने के लिए समाज को एकजुट होकर प्रयास करना होगा। उन्होंने शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को समाज की प्रगति का आधार बताया।

समारोह में देश के विभिन्न राज्यों और स्थानीय सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक लोक कलाओं की प्रस्तुतियां दीं। आनंद यूनिवर्सिटी गुजरात की टीम ने ‘रावठा नृत्य’, कोंडागांव छत्तीसगढ़ की टीम ने ‘रेलापाटा नृत्य’, भगवानलाल रोत ने ‘घुमरा नृत्य’ तथा बंसी भाई एंड साबला टीम ने ‘गैर नृत्य’ प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में सोहनलाल परमार, हरिश्चंद्र रोत, मंजुला रोत, सुरेंद्र वरहात, नानालाल पारगी, बबीता कच्छप, पोपट खोखरिया और विक्रम भील टोंक सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। समारोह के दौरान पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक अधिकारों और आदिवासी समाज के भविष्य को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष