विश्व बैंक के ‘सूत्रा’ से बदलेगी राजस्थान के शहरों की सूरत, 3500 करोड़ से अधिक खर्च करने की योजना

 


जयपुर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान के शहरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और शहरी जीवन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में विश्व बैंक ने बड़ी परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है। ‘सस्टेनेबल अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन इन राजस्थान एक्सीलरेटेड’ (सूत्रा) नामक इस परियोजना के तहत प्रदेश के चार प्रमुख शहरी क्लस्टर और उनसे जुड़े 28 सैटेलाइट टाउन के विकास की योजना है। प्रस्तावित परियोजना की लागत 38 करोड़ 57 लाख अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग 3,500 करोड़ रुपये से अधिक रखी गई है। इसका उद्देश्य शहरों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ पर्यटन, परिवहन और नगर निकायों की कार्यक्षमता में सुधार करना है।

विश्व बैंक के अनुसार, परियोजना में कुल 32 शहरी स्थानीय निकायों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा और भरतपुर के चार प्रमुख शहरी क्लस्टर तथा उनसे जुड़े 28 छोटे शहर शामिल होंगे। वर्ष 2026 में इन क्षेत्रों की अनुमानित आबादी 78 लाख से अधिक बताई गई है। ऐसे में परियोजना के माध्यम से बढ़ती शहरी आबादी की जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। राजस्थान की पहचान उसकी ऐतिहासिक इमारतों, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों से जुड़ी है। परियोजना के तहत विरासत क्षेत्रों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देने की योजना है।

ऐतिहासिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने और शहरी क्षेत्रों को पर्यटकों के अनुकूल बनाने से पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही शहरों में सार्वजनिक सुविधाओं और आवागमन की व्यवस्था सुधारने पर भी काम किया जाएगा।

परियोजना में शहरी परिवहन और संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी सुविधाओं के विकास को भी प्राथमिकता दी जाएगी। शहरों में बढ़ती गर्मी के दौरान जल संकट और बारिश के समय जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए भी उपाय प्रस्तावित हैं। इन कार्यों का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों को अधिक सुविधाजनक, व्यवस्थित और रहने योग्य बनाना है।

‘सूत्रा’ परियोजना केवल सड़कों और नागरिक सुविधाओं के विकास तक सीमित नहीं रहेगी।

इसके तहत नगर निकायों की आय बढ़ाने, राजस्व व्यवस्था सुधारने और ऋण प्रबंधन को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ाकर शहरी आधारभूत ढांचे के लिए निजी और वाणिज्यिक निवेश जुटाने की व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे शहरों के विकास कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी राजस्थान अरबन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (आरयूआईडीपी) होगी।

विश्व बैंक के अनुसार, परियोजना की तकनीकी डिजाइन की समीक्षा 10 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित है, जबकि विश्व बैंक के बोर्ड से 2 जुलाई 2027 तक अनुमोदन मिलने की संभावना जताई गई है।

कुल प्रस्तावित लागत में विश्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक से 27 करोड़ डॉलर का ऋण और राजस्थान सरकार की ओर से 11 करोड़ 57 लाख डॉलर का वित्तपोषण शामिल है। हालांकि, परियोजना अभी प्रस्तावित चरण में है और इसके क्रियान्वयन से जुड़े कार्य आगे की मंजूरी तथा प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित