वंडर सीमेंट की प्रस्तावित लाइम स्टोन परियोजना की जनसुनवाई में ग्रामीणों का विरोध, प्रदूषण और जल संकट पर उठाए सवाल
चित्तौड़गढ़, 10 जून (हि.स.)। वंडर सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित फलवा लाइम स्टोन ब्लॉक परियोजना के लिए आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने कंपनी और संबंधित विभागों के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर पर्यावरण, स्वास्थ्य और जल संसाधनों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना था कि यदि स्थानीय लोगों के जीवन और प्राकृतिक संसाधनों की कीमत पर परियोजनाएं लागू की जाएंगी, तो इसे विकास नहीं बल्कि विनाश कहा जाएगा।
वंडर सीमेंट संयंत्र के निकट आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने सबसे पहले सुनवाई की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े किए। ग्रामीण तुलसीराम धाकड़ ने कहा कि जिस फलवा गांव की भूमि परियोजना से सीधे प्रभावित होने वाली है, वहां जनसुनवाई आयोजित करने के बजाय दूसरे स्थान का चयन किया गया, जिससे वास्तविक प्रभावित लोगों की आवाज दबाने का प्रयास प्रतीत होता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी की वर्तमान खदानों में होने वाली भारी ब्लास्टिंग के कारण आसपास के गांवों के मकानों में दरारें पड़ रही हैं और लोगों में भय का वातावरण बना हुआ है। उनका कहना था कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कंपनी की ओर से नुकसान की भरपाई या समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
जनसुनवाई के दौरान प्रदूषण को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की गईं। ग्रामीणों का कहना था कि खनन और सीमेंट उत्पादन से उड़ने वाली धूल के कारण क्षेत्र में दमा, श्वास संबंधी रोग और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामलों में वृद्धि हुई है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है।
जल संकट और भूजल गुणवत्ता को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई। उनका आरोप था कि खनन गतिविधियों के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है तथा पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में क्षेत्र को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने कंपनी पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि कंपनी द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं, जहां न तो विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध रहते हैं और न ही गंभीर बीमारियों के उपचार की व्यवस्था होती है।
हरित विकास के दावों पर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि कंपनी जितने पौधारोपण का दावा करती है, उसका बहुत कम हिस्सा धरातल पर दिखाई देता है। अधिकांश पौधे पंचायत भूमि पर लगाए गए हैं, जबकि कंपनी परिसर में हरित क्षेत्र का विस्तार अपेक्षित स्तर पर नहीं हुआ है।
ग्रामीणों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि प्रदूषण, भूजल दोहन और ब्लास्टिंग से संबंधित शिकायतें वर्षों से की जा रही हैं, लेकिन मंडल द्वारा प्रभावी निगरानी और कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना था कि निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
जनसुनवाई में उपखंड अधिकारी विकास पंचोली, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी आशीष बोरासी, वंडर सीमेंट के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। इस दौरान लक्ष्मण सिंह बडौली, रमेश कुमावत, रजनीश गोठवाल, दीपक भट्ट और सुरेशचंद्र सहित कई ग्रामीणों ने अपने विचार रखे और मांग की कि नई परियोजना को स्वीकृति देने से पहले मौजूदा खनन गतिविधियों से जुड़े प्रदूषण, स्वास्थ्य प्रभाव, जल संकट और ब्लास्टिंग से हुए नुकसान की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल