पश्चिम राजस्थान के जल-विहीन इलाकों में भूजल संभावनाओं को मिला नया आधार
जैसलमेर, 13 जनवरी (हि.स.)। जिले के पोकरण विधानसभा क्षेत्र में किए गए हेलीबोर्न सर्वे के परिणाम अत्यंत उत्साहवर्धक सामने आए हैं।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के विशेष प्रयासों से वर्ष 2021 में कराए गए इस अत्याधुनिक सर्वेक्षण से पश्चिम राजस्थान के जल-विहीन क्षेत्रों में पानी की समस्या के स्थायी समाधान की नई संभावनाएं सृजित हुई हैं।
केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा जिला कलक्टर, जैसलमेर को प्रेषित सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पोकरण क्षेत्र के ऐसे अनेक स्थानों पर भूजल उपलब्धता के संकेत मिले हैं, जहां पूर्व में किए गए पारंपरिक अनुसंधानों में सफलता नहीं मिल पाई थी। यह सर्वे भारत सरकार के केंद्रीय भूजल बोर्ड, एनजीआरआई हैदराबाद एवं राज्य सरकार सरकार के भूजल विभाग के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।
इस सर्वे के तहत पोकरण विधानसभा क्षेत्र के फलसूंड से छायन एवं धुडसर से राजगढ़ तक के विस्तृत भू-भाग में गहन वैज्ञानिक अनुसंधान किया गया। वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार पोकरण तहसील का अधिकांश क्षेत्र अब तक भूजल की दृष्टि से अत्यंत अल्प जल वाला माना जाता रहा है, किंतु हेलीबोर्न सर्वे में ऐसे गांवों में भी भूजल मिलने की प्रबल संभावनाएं सामने आई हैं, जहां पानी की कोई उम्मीद नहीं मानी जाती थी।
क्या है हेलीबोर्न सर्वे
हेलीबोर्न सर्वे एक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें हेलीकॉप्टर के माध्यम से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एवं जियोफिजिकल प्रक्रियाओं का उपयोग कर भूजल की खोज की जाती है। इस तकनीक से कम समय एवं कम क्षेत्र में अत्यंत सटीक परिणाम प्राप्त होते हैं।
पोकरण क्षेत्र में किए गए इस सर्वे में कुल 64 स्थानों पर भूजल उपलब्धता के संकेत मिले हैं, जिनमें से 55 ऐसे स्थान हैं जहां पूर्व अनुसंधानों में भूजल नहीं मिल पाया था। इनमें अधिकांश वे गांव शामिल हैं जहां पेयजल की गंभीर समस्या बनी रहती है।
लगभग 15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किए गए इस सर्वे से न केवल भूजल स्रोतों की पहचान संभव हुई है, बल्कि भूजल पुनर्भरण के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की भी जानकारी प्राप्त हुई है। यद्यपि पोकरण एवं भनियाणा उपखंड में नहर का पानी पेयजल के लिए उपलब्ध हो चुका है, फिर भी इन चिन्हित स्थलों पर नलकूप निर्माण से आपात परिस्थितियों में आमजन को जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
विशेष रूप से फलसूंड क्षेत्र में भूजल की उपलब्धता सामने आना इस सर्वे की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो भविष्य में क्षेत्र की जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / चन्द्रशेखर