सुबह हाथ-पैर में कमजोरी और बोलने में परेशानी स्ट्रोक के संकेत: डॉ. गौरव गोयल

 


जयपुर, 27 अक्टूबर (हि.स.)। ब्रेन स्ट्रोक केवल जागते समय ही नहीं, बल्कि नींद के दौरान भी आ सकता है। कई बार व्यक्ति रात में सामान्य स्थिति में सोता है, लेकिन सुबह उठने पर हाथ-पैर में कमजोरी, चेहरा टेढ़ा होने या बोलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसे चिकित्सा भाषा में ‘वेक-अप स्ट्रोक’ कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज करना गंभीर हो सकता है।

नारायणा हॉस्पिटल जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोलॉजी डॉ. गौरव गोयल के अनुसार वेक-अप स्ट्रोक में मरीज को नींद से जागने के बाद लक्षण दिखाई देते हैं। चूंकि व्यक्ति सो रहा होता है, इसलिए स्ट्रोक शुरू होने का सही समय पता लगाना मुश्किल होता है। स्ट्रोक में मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली नस में रुकावट आ सकती है या रक्त वाहिका फटने से मस्तिष्क में रक्तस्राव हो सकता है।

डॉ. गौरव गोयल के अनुसार सुबह उठने पर चेहरे का एक हिस्सा झुकना, एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने अथवा दूसरों की बात समझने में परेशानी, अचानक दिखाई देना कम होना और चलने में संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपाय करने या आराम करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

डॉ. गोयल के अनुसार स्ट्रोक के इलाज में समय महत्वपूर्ण होता है। वेक-अप स्ट्रोक में लक्षण शुरू होने का समय स्पष्ट नहीं होने के बावजूद कुछ मरीजों का आधुनिक एमआरआई और सीटी स्कैन जांच के आधार पर उपचार संभव है। मरीज की स्थिति और जांच रिपोर्ट के अनुसार रक्त का थक्का घोलने वाली दवा या मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी से थक्का निकालने जैसे उपचार किए जा सकते हैं।

डॉ.गोयल के अनुसार स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलानी चाहिए। डॉक्टर को यह बताना जरूरी है कि मरीज आखिरी बार कब सामान्य स्थिति में था। मरीज को स्वयं एस्पिरिन या दूसरी दवा नहीं देनी चाहिए, क्योंकि स्ट्रोक का प्रकार जांच के बाद ही स्पष्ट होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचने से मस्तिष्क को होने वाले नुकसान और स्थायी विकलांगता के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश