चम्बल का पानी चित्तौड़ लाने का मार्ग प्रशस्त, कार्यादेश जारी गहलोत सरकार में स्वीकृत हुई थी परियोजना
चित्तौड़गढ़, 26 मार्च (हि.स.)। विधानसभा क्षेत्र चित्तौड़गढ़ में पेयजल समाधान के लिए राजस्थान की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में स्वीकृत चंबल परियोजना धरातल पर उतरने जा रही है। इसके लिए 648 की करोड़ की लागत वाली इस योजना में एलएनटी कंपनी को 636 करोड़ रुपए की राशि में कार्यादेश जारी हो गया है। यह कंपनी वर्तमान में बेगू-भैंसरोड़गढ़ चम्बल परियोजना का कार्य भी कर रही है।
इस परियोजना को लेकर पूर्व विधायक सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने बताया कि कांग्रेस सरकार में भीलवाड़ा के सहाड़ा में प्रभारी के तौर पर गांव-गांव में चुनावी दौरे के दौरान वहां पानी का क्राइसिस देखा था। उसी वक्त चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के लिए पानी के संकट को दूर करने के लिए उस समय के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चम्बल परियोजना की मंजूरी 2021-2022 में ही करवा दी थी। निरन्तर तात्कालीन मुख्य अभियंता पीएचडी लुहाड़िया, दिनेश गोयल एवं अन्य अधिकारियों के संपर्क में रह कर इस योजना को मूर्त रूप देने के प्रयास में लगा रहा। सरकार बदलने के बाद भी योजना को लेकर अधिकारियों से बराबर संपर्क में रहा एवं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस योजना के लिए बार-बार फीडबैक लेते रहते थे। इस योजना की मंजूरी के लिए चित्तौड़गढ़ की जनता को उनका आभार।
पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने बताया कि पूर्व में बार-बार उच्च बीड की वजह से कार्यादेश निरस्त हो जाते थे एवं नेगोसिएशन भी सफल नहीं हुए थे। आखिरकार एलएनटी कंपनी को कार्यादेश जारी होने से बहुप्रतीक्षित यह योजना शीघ्र घर-घर पहुंचेगी जो कि जनता जल मिशन योजना के अंतर्गत ही मूर्तरूप लेंगी।
278 गांव एवं मजरे होंगे कवर
चम्बल परियोजना से चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के 278 गांव, ढाणी, मजरे, एवं चित्तौड़गढ़ शहर के साथ निंबाहेड़ा के 66 गांव भी शामिल है बस्सी क्षेत्र में उच्च जलाशय बनेगा जिसमें राजगढ़ से पानी की कनेक्टिविटी मिलेगी। इस जलाशय से घाटा क्षेत्र, एवं बस्सी के आस पास के गांवों को पानी की आपूर्ति होगी, सबसे बड़ा उच्च जलाशय सेमलपुरा में बनेगा जिससे चित्तौड़गढ़ शहर एवं ग्रामीण में जलापूर्ति होगी, कन्नौज के जलाशय से भदेसर क्षेत्र की पंचायतों को पांडोली के जलाशय से आस पास के ग्राम पंचायत में जलापूर्ति होगी। इस परियोजना से प्रत्येक ग्राम पंचायत में 18 से 20 करोड़ एवं बस्सी एवं सावा जैसी बड़ी ग्राम पंचायत में 30 से 50 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस परियोजना के मूर्त रूप लेते ही आगामी 50 वर्षों तक की पेयजल समस्या का समाधान होगा।
वर्जन....
आगामी 50 वर्षों तक चित्तौड़गढ़ की पेजयल समस्या का समाधान इस परियोजना से होगा। पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में इस परियोजना की स्वीकृति हुई थी जो अब धरातल पर उतरने को तैयार है।
सुरेन्द्रसिंह जाड़ावत
पूर्व विधायक, चित्तौड़गढ़
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल