प्रदेश के 296 शहरों में होगा वेस्ट वाटर मैनेजमेंट
जयपुर, 20 फ़रवरी (हि.स.)। स्वायत्त शासन राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश के कई शहर वर्तमान मापदंडों के अनुसार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की स्थापना के लिए पात्र नहीं हैं। ऐसे 296 शहरों में वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा के तहत व्यापक वेस्ट वाटर मैनेजमेंट कार्य किए जाएंगे।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक गोपीचंद मीणा के पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि जहाजपुर सहित इन शहरों में वेस्ट वाटर को एकत्र कर पाइपलाइन के माध्यम से ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही ठोस मानव अपशिष्ट का निस्तारण एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) के जरिए किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि स्टेट सीवरेज एंड वेस्ट वाटर पॉलिसी 2025 के तहत किसी भी शहर में सीवरेज नेटवर्क के लिए 135 एलपीसीडी (लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन) जल आपूर्ति और न्यूनतम 100 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर जनसंख्या घनत्व अनिवार्य है। वर्तमान में जहाजपुर में जल आपूर्ति 135 एलपीसीडी से कम है और जनसंख्या घनत्व भी निर्धारित मानक से नीचे है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वित्त विभाग से स्वीकृति मिलते ही संबंधित शहरों में वेस्ट वाटर मैनेजमेंट के कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
मंत्री ने यह भी कहा कि जहाजपुर नगर पालिका क्षेत्र में गलत तरीके से कराई गई जमीन रजिस्ट्री के मामले में संबंधित पट्टों को निरस्त किया जाएगा तथा दोषी अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मूल प्रश्न के लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि प्रदेश के नगरीय निकायों में वर्तमान में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने स्वीकृत और निर्माणाधीन एसटीपी का राशि सहित विवरण सदन के पटल पर रखा।
खर्रा ने कहा कि सरकार भविष्य में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन पर भी विचार कर रही है, ताकि नगरीय क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित