(अपडेट) राजस्थान में निकाय चुनाव का बिगुल: 309 शहरों में दो चरणों में मतदान, 14 सितंबर को आएंगे नतीजे
जयपुर, 19 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान में लंबे समय से टल रहे नगरीय निकाय चुनावों का आखिरकार बुधवार शाम 4 बजे बिगुल बज गया। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि राजस्थान के इतिहास में पहली बार सभी नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव कराए जा रहे हैं। सरकार की ओर से घोषित ‘एक प्रदेश-एक चुनाव’ की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार नगरीय निकायों में मतदान दो चरणों में होगा। पहले चरण में 9 सितंबर और दूसरे चरण में 11 सितंबर को मतदान कराया जाएगा, जबकि 14 सितंबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। सभी निकायों में मतदान ईवीएम के माध्यम से होगा।
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही शहरों की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्षद से लेकर निकाय प्रमुख तक की कुर्सी के लिए दावेदारों की दौड़ शुरू हो गई है। वहीं राजनीतिक दलों के सामने भी प्रत्याशियों के चयन की चुनौती खड़ी हो गई है।
21 सितंबर को निकाय प्रमुख, 22 को उपाध्यक्ष का चुनाव
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि निर्वाचित बोर्ड बनने के बाद 21 सितंबर को निकाय प्रमुखों का चुनाव कराया जाएगा। इसके अगले दिन 22 सितंबर को उपाध्यक्ष, उपसभापति और डिप्टी मेयर के चुनाव होंगे। इसी दिन नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं की साधारण सभा की बैठक भी आयोजित की जाएगी।
10,245 वार्डों में होगा मुकाबला
प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में कुल 10,245 वार्ड हैं। इनमें 1,933 वार्ड ओबीसी, 1,794 एससी और 395 वार्ड एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं 6,123 वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं। इनमें 4,120 वार्ड अनारक्षित खुले वर्ग के और 2,003 वार्ड अनारक्षित महिला वर्ग के हैं।
महिलाओं की भागीदारी भी चुनाव में खास रहने वाली है। आरक्षण व्यवस्था के तहत अलग-अलग श्रेणियों में 33 प्रतिशत वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसके चलते प्रदेश के निकायों में 3,356 महिला पार्षदों के चुने जाने का रास्ता साफ हुआ है।
121 निकाय प्रमुख पद आरक्षित
निकाय प्रमुखों के पदों के आरक्षण में भी अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। 60 निकाय प्रमुख पद ओबीसी, 50 एससी और 11 एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। शेष पद अन्य श्रेणियों के लिए आरक्षण व्यवस्था के अनुसार निर्धारित हैं।
1.15 लाख कर्मचारी और 98,709 पुलिसकर्मी संभालेंगे मोर्चा
चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक तैयारियां की गई हैं। आयोग के अनुसार चुनाव प्रक्रिया में करीब 1.15 लाख कर्मचारी लगाए जाएंगे, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए 98,709 पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। प्रत्याशियों को चुनाव परिणाम के बाद निर्धारित समय सीमा में अपने चुनाव खर्च का विवरण भी देना होगा और 15 दिन के भीतर खर्च का हिसाब प्रस्तुत करना होगा।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक तबादलों पर रोक
आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निकाय क्षेत्रों में कर्मचारियों के तबादले नहीं किए जाएंगे। हालांकि चुनाव घोषणा से पहले शुरू हो चुके विकास कार्यों को आचार संहिता के दायरे से बाहर रखा गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई चुनावी प्रक्रिया
नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए 15 नवंबर तक दोनों चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही 15 अगस्त तक आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग ने निकाय प्रमुखों और वार्डों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर संबंधित आंकड़े राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दिए।
अब चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही प्रदेश के 309 शहरों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। कहीं टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं तो कहीं आरक्षण ने पुराने समीकरणों को पूरी तरह पलट दिया है। 9 और 11 सितंबर को मतदाता ईवीएम का बटन दबाएंगे और 14 सितंबर को तय होगा कि शहर की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित