विश्वेंद्र सिंह के कांग्रेस पर फिर तीखे तेवर, बोले- राजस्थान में पार्टी का कोई धणी-धोरी नहीं, सब राम भरोसे

 




जयपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान कांग्रेस में वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह और प्रदेश नेतृत्व के बीच चल रही तल्खी थमने का नाम नहीं ले रही है। अनुशासन समिति की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी विश्वेंद्र सिंह के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने फिर कांग्रेस की कार्यशैली और प्रदेश में पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने 60 साल तक देश पर शासन किया, आज राजस्थान में उसका कोई धणी-धोरी नहीं है और पार्टी राम भरोसे हो गई है। उन्होंने पार्टी के नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे जिस डाल पर बैठते हैं, उसी को काटते हैं। साथ ही प्रदेश कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं को अहम और वहम की राजनीति से बाहर निकलने की नसीहत दी।

विश्वेंद्र सिंह ने करीब 10 दिन पहले राजस्थान कांग्रेस के नेतृत्व और कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद 2 अक्टूबर को कांग्रेस अनुशासन समिति ने उन्हें नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा था।

समिति ने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भरतपुर व डीग के जिलाध्यक्षों के खिलाफ बयानबाजी, निकाय चुनाव में पार्टी के लिए काम नहीं करने तथा संगठनात्मक गतिविधियों के प्रति उदासीनता जैसे आरोपों का उल्लेख किया था। हालांकि, शुक्रवार को विश्वेंद्र सिंह ने नोटिस का जवाब देने के बजाय सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी और पार्टी नेतृत्व पर फिर निशाना साधा।

पूर्व मंत्री ने अपनी पोस्ट में अपने राजनीतिक जीवन, सिद्धांतों और जनसेवा का जिक्र किया। उन्होंने स्वयं को अपने इष्ट श्री गिरिराज धनी का सेवक बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सही का साथ दिया और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता की आवाज को प्राथमिकता दी। विधायक, सांसद और मंत्री के रूप में मिली जिम्मेदारियों को ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता से निभाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि वह अंतिम सांस तक जनता की सेवा करते रहेंगे।

विश्वेंद्र सिंह ने लिखा कि उन्होंने अपने पुरखों की मान-मर्यादा को ध्यान में रखकर फैसले किए और नेकी, सेवाभाव, सहजता तथा सरलता की विरासत को आगे बढ़ाया। उनके अनुसार, उन्होंने स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया और अंतरात्मा की आवाज के आधार पर अपने उसूलों पर कायम रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि वफादारी की कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की।

विश्वेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं के साथ अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके दिल और घर के दरवाजे हमेशा कार्यकर्ताओं के लिए खुले रहे हैं और आगे भी खुले रहेंगे। उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें किसी से कोई अपेक्षा नहीं है। जनता का प्यार और स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर उन्होंने फैसला जनता पर छोड़ते हुए कहा कि जनता का जो भी आदेश होगा, उसे वह शिरोधार्य करेंगे।

विश्वेंद्र सिंह ने 30 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर रीट में धांधली और अपने बेटे, बहू व रिश्तेदारों को आरएएस साक्षात्कार में अधिक अंक दिलवाने के आरोप लगाए थे। उन्होंने इन आरोपों के आधार पर डोटासरा से इस्तीफा देने अथवा पार्टी नेतृत्व से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। उन्होंने राज्य सरकार से भी मामले की जांच कराने की मांग की थी। ये आरोप विश्वेंद्र सिंह की ओर से लगाए गए हैं; उनकी स्वतंत्र पुष्टि के संबंध में उपलब्ध जानकारी में कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

भरतपुर और डीग में हालिया शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस को बोर्ड नहीं मिलने पर भी विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेशाध्यक्ष और दोनों जिलों के कांग्रेस नेताओं को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद 2 अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में पार्टी की रीति-नीति से असहमति जताते हुए कांग्रेस को अलविदा कहने के संकेत भी दिए थे।

विश्वेंद्र सिंह की बयानबाजी पर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी थी। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक अक्टूबर को कहा था कि पार्टी में एकता है और सभी नेता साथ हैं। दो अक्टूबर को उन्होंने विश्वेंद्र सिंह को पार्टी का वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा था कि उनकी बात सुनी जाएगी और केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर कोई धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए।

वहीं, महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष सारिका सिंह चौधरी और प्रदेश महासचिव देशराज मीणा सहित कुछ नेताओं ने विश्वेंद्र सिंह के बयानों पर सवाल उठाए थे।

प्रदेश महासचिव जसवंत गुर्जर ने भी उनकी बयानबाजी को पार्टी की परंपरा के अनुरूप नहीं बताया था।

लगातार सामने आ रहे बयानों और अनुशासन समिति के नोटिस के बाद राजस्थान कांग्रेस में विश्वेंद्र सिंह की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक ओर वह प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता उनकी बात सुनने की बात कह चुके हैं। विश्वेंद्र सिंह ने फिलहाल अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित