मरू कोकिला सीमा मिश्रा को ‘विरासत-ए-राजस्थान’ लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

 


जयपुर, 03 नवंबर (हि.स.)। “हम सबको कम से कम अपने-अपने घरों में तो राजस्थानी भाषा ही बोलनी चाहिए। इससे अपनी भाषा को बढ़ावा मिलने के साथ अपनापन भी बढ़ेगा, क्योंकि राजस्थानी भाषा में अपनायत है, जो सबको आपस में जोड़ने का काम करती है।” यह कहना था राजस्थान की सिरमौर लोकगायिका और मरू कोकिला के नाम से पहचान रखने वाली सीमा मिश्रा का। वे झालाना स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में अपनी 50वीं स्वर्णिम जन्म वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रही थीं।

राजस्थान लोकसंगीत-कला अकादमी और स्वर माधुरी मल्टीमीडिया की ओर से आयोजित समारोह में सीमा मिश्रा को राजस्थानी लोकगीत-संगीत, भाषा और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा प्रचार-प्रसार में तीन दशक के योगदान के लिए ‘विरासत-ए-राजस्थान’ लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। समारोह में प्रदेशभर से कला, संस्कृति, राजनीति, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने शिरकत की।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद झुंझुनूं जिले के छापोली (उदयपुरवाटी) में सड़क निर्माण कार्य के दौरान करंट लगने से जान गंवाने वाले श्रमिकों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की गईं।

समारोह में सांसद मंजू शर्मा, विधायक रविंद्र सिंह भाटी, जयपुर महापौर सुनील कोठारी, उप महापौर सरोज कंवर, वरिष्ठ शिक्षाविद राजवीर सिंह चलकोई, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़, पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, विधायक हाकम अली खान, विधायक बालमुकुंदाचार्य, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक अश्विन दल्वी, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के संस्थापक ओपी अग्रवाल और उद्योगपति कमल पोद्दार सहित अनेक अतिथि मौजूद रहे।

इसके अलावा पद्मश्री रामकिशोर छीपा, अहमद हुसैन, मोहम्मद हुसैन, गुलाबो सपेरा, तिलक गिताई और मुन्ना मास्टर सहित कला जगत की हस्तियां शामिल हुईं। प्रशासनिक क्षेत्र से आईएएस रवि जैन, शमित शर्मा और आरएएस पंकज ओझा व प्रियंका जोधावत भी उपस्थित रहे।

मुख्य संयोजक शिव विनायक शर्मा ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य सीमा मिश्रा की तीन दशक की स्वर-साधना को सम्मानित करने के साथ राजस्थानी लोकगीत-संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। लोक कलाकारों को प्रोत्साहन देने और युवाओं में अपनी भाषा व संस्कृति के प्रति गौरव की भावना जगाने की आवश्यकता है।

समारोह में 31 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को ‘नवपीढ़ी प्रेरणादूत सम्मान’ प्रदान किया गया। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और सोशल मीडिया के जरिए राजस्थानी कला, परंपराओं और लोकसंस्कृति को पहचान दिलाने का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में राजस्थानी लोकगीत-संगीत की परंपरा, वर्तमान चुनौतियों और लोक संस्कृति के संरक्षण में नई पीढ़ी की भूमिका पर चर्चा हुई। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया। आयोजन ने राजस्थानी भाषा और लोकसंगीत को प्रदेश की पहचान तथा सांस्कृतिक विरासत बताते हुए इनके संरक्षण का सामूहिक संकल्प दोहराया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश