विघ्नहर्ता गणपति और हिन्दी, दोनों भारतीय संस्कृति की शक्ति, संवेदना और संस्कार के प्रतीक : देवनानी
जयपुर, 13 सितंबर (हि.स.)। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गणेश चतुर्थी एवं हिन्दी दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्री गणेश भारतीय संस्कृति में बुद्धि, विवेक, ज्ञान, संयम और शुभारम्भ के प्रतीक हैं, वहीं हिन्दी हमारी भावनाओं, संस्कारों, विचारों और राष्ट्रीय एकता को अभिव्यक्ति देने वाली सशक्त भाषा है।
देवनानी ने कहा कि गणपति की आराधना से विघ्न तो दूर होते ही है साथ में जीवन में विवेक को सर्वोच्च स्थान देने की प्रेरणा भी मिलती है। भगवान गणेश हमें सिखाते हैं कि बड़ी से बड़ी चुनौती का समाधान शक्ति से पहले बुद्धि, धैर्य और संतुलित विचार से खोजा जाता है। गणेश चतुर्थी का पर्व समाज में सद्भाव, सेवा, संस्कार और सामूहिकता की भावना को सुदृढ़ करता है।
हिन्दी दिवस के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हिन्दी भारत की आत्मा की सहज अभिव्यक्ति और जन-जन के संवाद की सशक्त भाषा है। हिन्दी ने देश की विविधताओं को जोड़ने और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हिन्दी के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाएं हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं और उनका संरक्षण तथा संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
श्री देवनानी ने कहा कि भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं तथा हिन्दी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। जब विवेकपूर्ण विचारों को अपनी भाषा की सहज अभिव्यक्ति मिलती है, तब समाज और राष्ट्र की ऊर्जा अधिक सशक्त होती है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर जीवन में ज्ञान, विवेक और सद्भाव को अपनाने तथा हिन्दी दिवस पर हिन्दी सहित सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान और संवर्धन का संकल्प लें।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभी प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव