विधानसभा में हंगामा, नारेबाजी और पोस्टर वार

 


जयपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को सदन की कार्यवाही हंगामे और नारेबाजी की भेंट चढ़ती रही। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने एक दिन पहले कांग्रेस विधायकों को विधानसभा के मुख्य द्वार पर रोके जाने और स्कूलों का निरीक्षण करने गए सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायकों ने सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ पोस्टर लहराए। इसके जवाब में भाजपा विधायकों ने भी कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और राहुल गांधी को लेकर आपत्तिजनक राजनीतिक नारे लगाए।

हंगामे के बीच विधानसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और बाद में एक बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

कार्यवाही शुरू होते ही जूली ने कहा कि स्कूलों का निरीक्षण करने गए सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई है और सरकार इस मामले पर चुप क्यों है। उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष जनता के मुद्दों को विधानसभा में उठाना चाहता है। जूली ने एक दिन पहले कांग्रेस विधायकों को विधानसभा गेट पर रोके जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि विधानसभा में आने वाले विधायकों को पहले कभी इस तरह नहीं रोका गया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की।

जूली के बयान के दौरान सदन में हंगामा बढ़ गया। कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ‘भगोड़ी सरकार’ लिखे पोस्टर लहराने लगे। सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री भी कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इस दौरान दोनों पक्षों के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए उसे ‘लोकतंत्र की हत्यारी’ बताया और कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। वहीं सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर कांग्रेस विधायकों को रोके जाने को लेकर कहा कि उनके साथ दूसरे लोग और असामाजिक तत्व भी थे, जिन्हें अंदर लाने की कोशिश की जा रही थी, इसलिए उन्हें गेट पर रोका गया।

हंगामे के बीच भाजपा विधायकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर भी नारेबाजी की।

भाजपा की ओर से राहुल गांधी को ‘भगोड़ा’ और ‘चोर’ बताते हुए नारे लगाए गए। दूसरी ओर कांग्रेस विधायक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। विधानसभा अध्यक्ष ने बार-बार विधायकों से अपनी-अपनी सीटों पर जाने की अपील की, लेकिन हंगामा थम नहीं सका।

दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी जारी रही। अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष और सत्ता पक्ष को शून्यकाल के बाद पांच-पांच मिनट बोलने का समय देने का आश्वासन दिया, लेकिन इसके बावजूद हंगामा जारी रहा। इसके चलते शून्यकाल में भी केवल करीब 18 मिनट ही कार्यवाही चल सकी और सदन को फिर एक बजे तक स्थगित करना पड़ा।

इस बीच शुक्रवार की कार्यसूची में यूसीसी विधेयक को शामिल नहीं किया गया। इससे इसके मौजूदा सत्र में पेश होने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नवंबर में फिर विधानसभा सत्र बुलाए जाने की संभावना है, जिसमें यूसीसी और ट्री प्रोटेक्शन बिल पर आगे कार्रवाई हो सकती है।

वहीं शुक्रवार के प्रश्नकाल में द्रव्यवती नदी पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड, खाद-बीज संकट और स्कूलों की मरम्मत जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने द्रव्यवती नदी से जुड़े एलिवेटेड रोड का सवाल उठाया, जबकि प्रमोद जैन भाया ने खाद-बीज संकट को लेकर सवाल लगाया।

मानसून सत्र के दूसरे दिन का घटनाक्रम साफ तौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का संकेत देता नजर आया। सदन के भीतर मुद्दों पर चर्चा से ज्यादा नारेबाजी, पोस्टर और आरोप-प्रत्यारोप हावी रहे, जिसके कारण विधानसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित