गहलोत राजनीतिक धुरी खोने के डर से दे रहे अनर्गल बयान : शेखावत

 


जयपुर, 08 जून (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस में बदलते राजनीतिक समीकरणों और सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चाओं से गहलोत असहज हैं। इसी कारण वे लगातार अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं।

सोमवार को जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान शेखावत ने कहा कि चार दशकों तक राजस्थान कांग्रेस की राजनीति की धुरी रहे गहलोत अब अपनी राजनीतिक स्थिति कमजोर पड़ने की आशंका से घिरे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए गहलोत समय-समय पर विवादित और अनावश्यक बयान देते रहते हैं।

शेखावत ने कहा कि गहलोत स्वयं को गांधीवादी नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उनका राजनीतिक व्यवहार सबके सामने है।

उन्होंने कहा कि गहलोत ने उन्हें अपनी राजनीतिक “लाइन लंबी करने” की सलाह दी है, जबकि राजस्थान और कांग्रेस का इतिहास इस बात का साक्षी है कि पार्टी में जिस भी नेता या कार्यकर्ता ने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित करने का प्रयास किया, उसे हाशिये पर धकेलने की कोशिश की गई।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे वीर दुर्गादास राठौड़ की परंपरा से प्रेरणा लेते हैं और उनकी ही तरह एक सामान्य परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि वीर दुर्गादास ने जिस निष्ठा और समर्पण के साथ अपने सिद्धांतों का निर्वहन किया, उसी भावना के साथ वे भी सार्वजनिक जीवन में कार्य कर रहे हैं। शेखावत ने कहा कि डर उनके स्वभाव और व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं है तथा वे अपने विचारों और संकल्पों के प्रति पूरी निष्ठा से कार्य करते हैं।

गहलोत पर निशाना साधते हुए शेखावत ने कहा कि वे इतने वरिष्ठ नेता हैं कि उनकी हर टिप्पणी का जवाब देना आवश्यक नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह कहना जरूरी है कि गहलोत ने अपने राजनीतिक जीवन में स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए कभी सत्ता, कभी आर्थिक संसाधनों और कभी मीडिया प्रभाव का उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रबंधन की इसी क्षमता के कारण राजस्थान के अनेक पत्रकार और राजनीतिक कार्यकर्ता उन्हें ‘जादूगर’ कहकर संबोधित करते हैं। शेखावत ने कहा कि गहलोत की इस राजनीतिक क्षमता से कार्यकर्ताओं को सीख लेने की आवश्यकता है।

राज्यसभा के लिए सतीश पूनियां और अलका गुर्जर के चयन का स्वागत करते हुए शेखावत ने कहा कि इससे राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और राजस्थान के मुद्दों को और अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा में कार्यकर्ताओं की भूमिका और जिम्मेदारियों का निर्धारण नेतृत्व द्वारा उनकी योग्यता, अनुभव और क्षमता के आधार पर किया जाता है। पूनिया और अलका गुर्जर का चयन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। शेखावत ने कहा कि पार्टी जहां भी जो जिम्मेदारी सौंपेगी, कार्यकर्ता उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाते हुए संगठन और विचारधारा का पक्ष मजबूती से रखेंगे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित