यूएन के आदिवासी अधिकार मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे सांसद राजकुमार रोत

 


डूंगरपुर, 11 जुलाई (हि.स.)। बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजकुमार रोत आगामी 13 से 17 जुलाई 2026 तक स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय 'पैलेस डेस नेशंस' में आयोजित होने वाले 'आदिवासी लोगों के अधिकारों पर विशेषज्ञ मंच' के 19वें सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। संयुक्त राष्ट्र का यह वही प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसने 9 अगस्त को 'विश्व आदिवासी दिवस' के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने और दुनिया भर में मूल निवासियों के अधिकारों को सुदृढ़ करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। अब इसी वैश्विक पटल पर सांसद रोत भारतीय आदिवासी समाज की आवाज़ बुलंद करेंगे।

इस गौरवपूर्ण अवसर पर सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि यह आमंत्रण केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों आदिवासियों के मुद्दों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक बड़ा माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सम्मेलन के दौरान जल, जंगल, जमीन, भारतीय संविधान की पाँचवीं और छठी अनुसूची, वनाधिकार अधिनियम, शिक्षा, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक संरक्षण तथा विस्थापन जैसी गंभीर चुनौतियों और अधिकारों से जुड़े विषयों को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष मजबूती से रखेंगे।

सांसद रोत ने इस वैश्विक भागीदारी को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने के लिए देश भर के आदिवासी समाज, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, शोधकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से व्यापक सहयोग की अपील की है। उन्होंने आह्वान किया है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आदिवासियों के वास्तविक मुद्दों और सुझावों को उन तक पहुँचाया जाए। सांसद ने विश्वास दिलाया कि प्राप्त होने वाले सभी महत्वपूर्ण सुझावों का गहन अध्ययन कर उन्हें इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के एजेंडे में शामिल किया जाएगा, ताकि भारतीय मूल निवासियों की वास्तविक परिस्थितियों और माँगों को वैश्विक स्तर पर सही ढंग से रेखांकित किया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष