सार संवाद मंच व ग्रामीणों के प्रयास से उदयपुर की हीरा बावड़ी का हुआ कायाकल्प
उदयपुर, 19 अप्रैल (हि.स.)। उदयपुर के तितरड़ी क्षेत्र में वर्षों से उपेक्षा और कचरे का अंबार बनी हीरा बावड़ी की तस्वीर अब पूरी तरह बदल गई है। सार संवाद मंच और स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से रविवार को चलाए गए विशेष सफाई अभियान में बावड़ी को पूरी तरह साफ कर नया जीवन दिया गया।
रविवार सुबह तितरड़ी और फांदा के ग्रामीण सुबह 7 बजे से ही सफाई कार्य में जुट गए। करीब चार घंटे तक चले इस अभियान में बावड़ी के भीतर जमा वर्षों पुराने कचरे को बाहर निकाला गया। इस दौरान प्लास्टिक की थैलियां, कांच की बोतलें और गहरे कीचड़ का बड़ा जमावड़ा मिला, जिसे हटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। अभियान के दौरान लगभग तीन ट्रैक्टर कचरा बाहर निकाला गया। सफाई के बाद बावड़ी को पानी से अच्छी तरह धोया गया, जिससे उसका पुराना स्वरूप वापस उभरकर सामने आया। अब बावड़ी साफ-सुथरी नजर आने लगी है और वहां से आने वाली बदबू भी पूरी तरह समाप्त हो गई है।
सार संवाद मंच के संयोजक अविचल दूबे ने बताया कि यह बावड़ी लंबे समय से उपेक्षित थी और गंदगी के कारण इसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया था। आसपास के लोग बदबू और गंदगी से काफी परेशान थे। वॉलियंटियर अनन्य सिंघल ने बताया कि यह मुहिम लगातार दूसरे वर्ष भी जारी है और हर रविवार शहर की एक बावड़ी को चिन्हित कर उसे स्थानीय सहयोग से साफ किया जाएगा। वहीं, वॉलियंटियर कौशिक घोष के अनुसार टीम अब तक सात बावड़ियों को पुनर्जीवित कर चुकी है। हीरा बावड़ी से पहले बेड़वास की बावड़ी को भी इसी प्रकार साफ किया गया था।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में बावड़ी को स्वच्छ बनाए रखने का संकल्प लिया। ग्रामीण प्रेमसिंह ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मांग की कि नगर निगम क्षेत्र में आने वाली इन बावड़ियों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल