मां के 75वें जन्मदिन पर अनोखा उपहार, दो विधवा बहनों को मिलेंगे पक्के मकान
राजसमंद, 14 अगस्त (हि.स.)। राजसमंद जिले के नाथद्वारा उपखंड के धींधागढ़ गांव में जर्जर मकान में जीवन गुजार रही दो विधवा बहनों के लिए समाजसेवी मेघराज धाकड़ ने दो पक्के मकान बनवाने की घोषणा की है। धाकड़ ने यह घोषणा अपनी माताजी कंकुबाई के 75वें जन्मदिन के अवसर पर की है। मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट मुंबई की ओर से दोनों मकानों का निर्माण आगामी छह माह में कराया जाएगा।
धींधागढ़ निवासी भंवरी बाई चौहान और जमना बाई चौहान लंबे समय से जर्जर मकान में रह रही हैं। बारिश के दौरान मकान की छत और दीवारें क्षतिग्रस्त होने से दोनों बहनों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था। उनकी स्थिति की जानकारी निजी समाचार माध्यम के जरिए मेघराज धाकड़ तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने इसे अपनी जन्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी मानते हुए स्वयं गांव पहुंचकर दोनों बहनों की स्थिति देखी।
धाकड़ 15 अगस्त को अपनी माताजी कंकुबाई के 75वें जन्मदिन के अवसर पर मुंबई से अपनी टीम के साथ धींधागढ़ पहुंचे। उन्होंने दोनों बहनों से मुलाकात कर उनके जर्जर मकानों का जायजा लिया। मकान की खराब स्थिति देखने के बाद उन्होंने तत्काल दोनों के लिए अलग-अलग पक्के मकान बनवाने की घोषणा की।
मेघराज धाकड़ ने कहा कि समाचार माध्यमों के जरिए जब उन्हें दोनों बहनों की परेशानी की जानकारी मिली तो उन्होंने इसे केवल एक खबर नहीं माना, बल्कि अपनी जन्मभूमि के प्रति नैतिक जिम्मेदारी समझी। उन्होंने कहा कि ईश्वर की प्रेरणा से ट्रस्ट दोनों बहनों को छह माह में सुरक्षित आशियाना उपलब्ध कराएगा।
धाकड़ ने कहा कि उनकी माताजी कंकुबाई का 15 अगस्त को 75वां जन्मदिन है। दोनों जरूरतमंद बहनों के लिए बनने वाले मकान उनकी माताजी की ओर से जन्मदिन का उपहार हैं। उन्होंने कहा कि जन्मदिन पर आमतौर पर प्रियजनों को उपहार दिए जाते हैं, लेकिन इस अवसर को किसी जरूरतमंद के जीवन में सुरक्षा और खुशियां लाकर मनाने की इच्छा थी।
उन्होंने प्रवासी समाज से अपनी जन्मभूमि और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न शहरों में रहने वाले प्रवासियों का अपनी जन्मभूमि से भावनात्मक संबंध होता है। जरूरतमंद को सुरक्षित छत उपलब्ध कराना केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उसके जीवन में सम्मान और नई उम्मीद देना है।
दोनों मकानों की घोषणा सुनकर भंवरी बाई और जमना बाई भावुक हो गईं। वर्षों से जर्जर मकान में रहने के बाद उन्हें अब सुरक्षित घर मिलने की उम्मीद जगी है। दोनों बहनों ने धाकड़, उनकी माताजी और ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त किया।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी पहल की सराहना करते हुए इसे मानव सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण बताया। ग्रामीणों ने कहा कि जरूरतमंद की सबसे बड़ी आवश्यकता को समझकर उसे पूरा करना ही सच्ची सेवा है।
इस अवसर पर कपिल जैन, भगवती धाकड़, मनीष पालीवाल, विष्णु बागोरा सहित मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट मुंबई के पदाधिकारी और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Giriraj Soni