सरकार की मंशा हम पुनः वेदों की ओर लौटें : टीएडी मंत्री
जयपुर, 17 जनवरी (हि.स.)। वन उत्पादों को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा उदयपुर के सज्जनगढ़ में आयोजित दो दिवसीय वन मेले का शुभारंभ शनिवार को जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने फीता काटकर किया। मेले में जिले और आसपास के क्षेत्रों से आए उत्पादकों द्वारा वन आधारित उत्पादों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई है।
मंत्री खराड़ी ने मेले में लगी प्रत्येक स्टॉल का अवलोकन किया और वन उत्पादों की गुणवत्ता, विपणन संभावनाओं एवं बाजार से जुड़ी जानकारियां लीं।
समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में लोग दीर्घायु और स्वस्थ जीवन के लिए वन औषधियों पर निर्भर रहते थे, लेकिन आज केमिकल युक्त चिकित्सा पद्धतियों पर अत्यधिक निर्भरता मानव स्वास्थ्य के लिए चुनौती बनती जा रही है। सरकार की मंशा है कि समाज को पुनः वेदों और प्राकृतिक जीवन पद्धति की ओर लौटाया जाए।
उन्होंने कहा कि वन उपज से दोहरे लाभ प्राप्त होते हैं। एक ओर ग्रामीणों को आजीविका का साधन मिलता है, वहीं दूसरी ओर लोगों को स्वास्थ्य लाभ भी होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सृजन के लिए ट्राईफेड जैसी संस्थाएं सराहनीय कार्य कर रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित दोहन ही भविष्य को सुरक्षित रख सकता है।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया ने कहा कि वन क्षेत्रों में उपलब्ध उपज से महुआ, शहद सहित अनेक मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि जहां वनवासी हैं, वहीं वन सुरक्षित हैं। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण में वन विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और वर्तमान में अरावली से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
लोकसभा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि ग्रामीण समुदाय वनों के महत्व को अच्छी तरह समझता है। उन्होंने अन्य देशों की बेहतर प्रथाओं को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे वन आधारित आजीविका को और मजबूती मिलेगी। साथ ही उन्होंने बांस को ग्रामीण रोजगार का सशक्त माध्यम बताते हुए इस दिशा में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता जताई।
दो दिवसीय वन मेले में बड़ी संख्या में ग्रामीण, उत्पादक, स्वयं सहायता समूह और आमजन पहुंच रहे हैं, जिससे वन आधारित उत्पादों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित