महात्मा गांधी अस्पताल में इलिजारोव तकनीक से नॉन-यूनियन व डिफॉर्मिटी का उपचार

 


बच्चों के पैर की हड्डी जोड़ी, टेढ़ेपन का किया सफलतापूर्वक ऑपरेशन

जोधपुर, 02 मई (हि.स.)। महात्मा गांधी अस्पताल के हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग में इलिजारोव तकनीक का उपयोग करते हुए दो बच्चों के पैर की जटिल हड्डी जोडऩे एवं टेढ़ेपन का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। दोनों मरीजों की सर्जरी सीनियर प्रोफेसर डॉ. किशोर रायचंदानी के नेतृत्व में योजनाबद्ध तरीके से की गई। बाहरी त्वचा एवं सॉफ्ट टिशू की स्थिति उपयुक्त न होने के कारण इलिजारोव रिंग फिक्सेटर का उपयोग किया गया।

सहायक आचार्य डॉ. निरोत्तम सिंह ने बताया कि झालामंड निवासी छह वर्षीय किशोर को तीन वर्ष पूर्व दुर्घटना में दाहिने पैर की हड्डी टखने के ऊपर से टूट गई थी। इसके उपचार हेतु जोधपुर एवं अहमदाबाद में पांच बार सर्जरी करवाई गई, लेकिन हड्डी नहीं जुड़ सकी तथा पैर में टेढ़ापन लगातार बढ़ता रहा, जिससे मरीज का चलना-फिरना अत्यंत कठिन हो गया था। इसी प्रकार, शेरगढ़ निवासी 9 वर्षीय सुशाीला के दाहिने पैर में एक वर्ष पूर्व हुई दुर्घटना के कारण टखने के ऊपर की हड्डी में खाली जगह बन गई थी, जिसके चलते उसका चलना-फिरना बंद हो गया था और वह लगभग बेड-रिडन हो गई थी।

सुशाीला के केस में डिस्ट्रैक्शन हिस्टोजेनेसिस के सिद्धांत के आधार पर लगभग सात सेंटी मीटर नई हड्डी का क्रमिक निर्माण किया गया तथा पास वाली फिबुला हड्डी को खाली हुई जगह में विस्थापित किया गया। वहीं, किशोर के केस में स्टिफ नॉन-यूनियन एवं प्रोकर्वेटम-वेरस डिफॉर्मिटी को ध्यान में रखते हुए फिबुलर ऑस्टियोटॉमी की गई तथा डिफॉर्मिटी के एपेक्स को क्रमिक ड्रिलिंग द्वारा सॉफ्ट किया गया। इसके बाद इलिजारोव रिंग फिक्सेटर की सहायता से डिफॉर्मिटी को पूर्णत: सुधारा गया तथा नॉन-यूनियन साइट को सही एलाइनमेंट में स्थिर किया गया।

विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार वैश्य ने बताया कि ऑर्थोपेडिक विभाग में सभी प्रकार के जटिल एवं कॉम्प्लेक्स मामलों का उपचार नवीनतम तकनीकों के माध्यम से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। महात्मा गांधी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. एफ.एस. भाटी एवं एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी. एस. जोधा ने इस सफल ऑपरेशन के लिए संपूर्ण टीम को बधाई दी तथा भविष्य में भी ऐसे जटिल एवं यूनिक मामलों को करने के लिए प्रोत्साहित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश