प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में बाघ की अहम भूमिका: विशेषज्ञ
जयपुर, 29 जुलाई (हि.स.)। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर बुधवार को मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में जयपुर टाइगर फेस्टिवल के तहत 'बाघ संरक्षण-संवाद' आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए बाघ संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और भारतीय संस्कृति में बाघ के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर जयपुर टाइगर फेस्टिवल के 8वें संस्करण के पोस्टर का विमोचन भी किया गया। महोत्सव का आयोजन 18 से 21 दिसंबर 2026 तक जयपुर में होगा।
प्रसिद्ध संगीतकार, गायक एवं वन्यजीव संरक्षक अभिषेक रे ने कहा कि बाघ शक्ति और संयम का अद्भुत संतुलन है। वह प्रकृति से केवल उतना ही लेता है, जितनी आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि संगीत और बाघ संरक्षण उनके बचपन के सपने रहे हैं तथा जंगल उन्हें नई धुनें रचने की प्रेरणा देता है। इस दौरान उनका रचित 'चीता एंथम' भी विद्यार्थियों को सुनाया गया।
सरिस्का टाइगर रिजर्व एवं केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के पूर्व फील्ड डायरेक्टर सुनयन शर्मा ने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण के लिए जंगल और जंगलों के संरक्षण के लिए बाघ आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देना उचित है, लेकिन बाघों को वाहनों से घेरकर दिखाना गलत संदेश देता है।
डॉ. राजेश कुमार व्यास ने कहा कि बाघ केवल हिंसक पशु नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक और धैर्य का भी प्रतीक है। उन्होंने बताया कि कई संस्कृतियों में बाघ की पूजा होती है तथा बैगा जनजाति स्वयं को बाघ का वंशज मानती है। उन्होंने कहा कि बाघ पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन और जंगलों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में सर्वेश अग्रवाल, आनंद अग्रवाल, अरुण नारंग, शुभम अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। टैगोर इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य डॉ. कमल राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। जयपुर टाइगर फेस्टिवल के सचिव आनंद अग्रवाल ने कहा कि संवाद का उद्देश्य बाघ संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और भारतीय संस्कृति के बीच गहरे संबंधों को समाज के सामने लाकर वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश