हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई शनि अमावस्या पर आस्था की डुबकी

 






अजमेर 16 मई(हि.स)। ज्येष्ठ मास में आने वाला वट सावित्री व्रत इस बार शनिवार को पड़ने से विशेष संयोग बना। सुहागिनों ने पति की लंबी आयु, सुख समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत किया और वट सावित्र के साथ शनि जयंती और शनिष्चरी अमावस्या श्रद्धा और आस्था से मनाई। महिलाओं ने बरगद के पेड़ की पूजा की और सुहग की वस्तुए अर्पित कर मन्नत का धागा बांधा। ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि बरगद के वृक्ष की तरह पति की आयु भी दीर्घ हो इसी कामना के साथ महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं। हिंदू धर्म में वट वृक्ष का पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसमें देवी देवताओं का वास होता है।

उधर, ज्येष्ठ माह की पावन अमावस्या के मौके पर शनिवार को पुष्कर सरोवर में विशेष धार्मिक स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही ज्येष्ठ अमावस्या का पुष्कर सरोवर में स्नान शुरू हो गया। मुख्य घाट श्रद्धालुओं से भर गए। लोग तर्पण व पिंडदान कर अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मशांति की कामना करने लगे ओर ब्राह्मणों और गायों को दान पुण्य कर मंदिरों के दर्शन को निकल गए।पंडित एवं ज्योतिषाचार्य कैलाश नाथ दाधीच ने बताया कि पुष्कर तीर्थ में देव अमावस्या के दिन पूर्वजों के तर्पण पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

अमावस्या के दिन शनिवार होने से बने विशेष संयोग से शनिमंदिरों में सुबह से ही लंबी कतारे लगनी शुरू हो गई जो देर शाम तक चलती रही। शनिभक्तों ने पूजा कर दान—पुण्य किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष