मंदिरों को संस्कार सेवा केंद्र बनाया जाए— शांता कुमारी

 


अजमेर, 1 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय सेवा संघ से जुड़ी राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांता कुमारी ने अजमेर के भगवान गंज स्थित शहीद अविनाश माहेश्वरी विद्यालय में एक संगोष्ठी को संबोधित किया। शांताकुमारी विद्यालय परिसर में चल रहे चित्तौड़ प्रांत के 15 दिवसीय प्रवेश वर्ग में प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए अजमेर आई हैं। प्रबुद्धजनों के सवालों के जवाब देते हुए संगोष्ठी में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी ने कहा, दिल्ली में जेएनयू यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में वामपंथी विचारधारा का प्रभाव है। एक सुनियोजित षडय़ंत्र के तहत हिंदू समुदाय के युवाओं को अपने परिवार से विमुख किया जाता है। वामपंथी सोच के तहत युवाओं को अपने अभिभावकों से दूर किया जाता है। यहां तक कि मांस खाना और नशीले पदार्थों का सेवन करने की आदत डाल दी जाती है। हालांकि अब सनातन धर्म की रीति-नीति के अनुरूप वामपंथी विचारधारा का मुकाबला किया जा रहा है। लेकिन जो अभिभावक अपने बच्चों को महानगरों में यूनिवर्सिटी और कॉलेज में पढ़ने के लिए भेजे हैं। उन्हें अपने बच्चों को विशेष ख्याल रखना चाहिए।

एक सवाल के जवाब में शांता कुमारी ने कहा, अब महानगरों में विधर्मी लोग भी हॉस्टलों का संचालन करने लगे हैं। ऐसे हॉस्टलों में बच्चों को मांस खाने की प्रवृत्ति डाली जा रही है। सनातन संस्कृति को मानने वाले अभिभावकों का यह दायित्व है कि वे देखे कि उनके बच्चे किसी हॉस्टल में प्रवेश ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसे हॉस्टलों में प्रवेश दिलवाना चाहिए जहां सनातन संस्कृति के अनुरूप खान-पान हो। उन्होंने लव जिहाद के बढ़ते प्रकरणों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभिभावकोंको अपनी बेटियों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। यदि बेटियां अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क में रहती हैं, तो फिर लव जिहाद जैसी बुराइयों से बचा जा सकता है। हमारे धर्म ग्रंथ व्यक्ति के मन को शुद्ध रखने की शिक्षा देते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में सनातन संस्कृति ही एक मात्र संस्कृति हैं, जो वसुधैव कुटुम्बकम की नीति को मानती है। हमारा मकसद विश्व का कल्याण हो और पूरा विश्व एक परिवार है। स्वामी विवेकानंद जब अमेरिका में गए तो उन से हिंदू संस्कृति के बारे में सवाल पूछा गया। तब स्वामी विवेकानंद ने कहा, पूरा विश्व कण-कण से निर्मित है और हमारी सनातन संस्कृति सब को एक साथ रखने की सीख देती है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भारत विश्व गुरु था। और अब फिर से विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने जनसंख्या के असंतुलन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, हमें परिवार में जागृति लाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा, आज 31 मई को अहिल्या बाई होल्कर का जन्मदिन भी है। अहिल्याबाई ने अपने जीवन काल में मंदिरों के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज के दिन हमें संकल्प लेना चाहिए कि हमारे पड़ोस के मंदिर संस्कार सेवा के केंद्र बने। मंदिरों के माध्यम से हम युवा पीढ़ी को अच्छे संस्कार दे सकते हैं। उन्होंने कहा, समाज में बालिकाओं को मजबूत बनाने की दृष्टि से ही राष्ट्र सेविका समिति के शिविर लगाए जा रहे हैं। अजमेर में चित्तौड़ प्रांत का जो शिविर लगा उसमें 80 बालिकाओं ने भाग लिया। इस शिविर में जो बालिकाएं प्रशिक्षित हुई है, वे समाज में लव जिहाद जैसी बुराइयों का मुकाबला करने में सक्षम होगी। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष