अक्षय तृतीया पर्व से वैष्णव मंदिरों में ठाकुर जी की दिनचर्या में परिवर्तन

 


जयपुर, 20 अप्रैल (हि.स.)। उदियात तिथि के अनुसार सोमवार को अक्षय तृतीया उत्सव भक्तिभाव से मनाया गया। श्री गोविंद धाम, पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथ जी, चौड़ा रास्ता स्थित राधा दामोदर जी, मदन गोपाल जी, सुभाष चौक स्थित श्री सरस निकुंज, रामगंज बाजार के लाड़लीजी, श्री बृज निधि जी, आंनद कृष्ण बिहारी जी सहित अन्य वैष्णव मंदिरों में सोमवार से ठाकुर जी की दिनचर्या में परिवर्तन देखने को मिला।

श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि वैशाख शुक्ल तृतीया से राजधानी के सभी प्रमुख वैष्णव मंदिरों में ग्रीष्म ऋतु के प्रभाव को देखते हुए ठाकुरजी की सेवा-पद्धति में बदलाव हो गया है। इसमें शीतलता प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

अब गर्मी के मौसम में प्रमुख मंदिरों में ठाकुरजी का केसर-चंदन से चंदन चौला श्रृंगार किया जाएगा। प्रात: अभिषेक के बाद भगवान को केसर और चंदन का लेप लगाया जाएगा। वहीं राधारानी के हाथ में बीजना (पंखा) अर्पित किया जाएगा। गर्भगृह में शीतल जल की व्यवस्था के लिए मिट्टी की सुराही और घड़े स्थापित किए गए। गर्मी को ध्यान में रखते हुए मंदिरों में साटन और सिल्क के स्थान पर सूती परदे लगाए गए हैं। बिछावन एवं अन्य सजावट में भी परिवर्तन कर भारी गलीचे, ऊष्मा बढ़ाने वाली सामग्री हटा दी गई है। ठाकुरजी की पोशाक सेवा में परिवर्तन करते हुए हल्के सूती वस्त्र, धोती-दुपट्टा आदि का उपयोग प्रारंभ कर दिया गया है।

भोग सेवा में भी मौसमानुसार बदलाव किया गया है। अब तक सर्दी के व्यंजन जैसे सोंठ-गोंद के लड्डू एवं मसालेदार पकवानों के स्थान पर ग्रीष्म ऋतु के फल एवं शीतल पदार्थ अर्पित किए जाएंगे। इनमें तरबूज, खरबूजा, आम, लीची, जामुन, फालसा, आमरस, सत्तू, ठंडाई, श्रीखंड, पंचमेवा, भीगी चना दाल आदि शामिल हैं। शयन भोग में भी गर्म दूध के स्थान पर रबड़ी, रसगुल्ले एवं ठंडाई अर्पित की जाएगी।

शहर के विभिन्न मंदिरों में भक्तों के लिए सत्तू प्रसादी का वितरण भी किया गया। यह ग्रीष्मकालीन सेवा व्यवस्था ज्येष्ठ माह भर जारी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश